Thursday, May 23, 2013

बहुत फर्क पडता है!

फेस-बुक पर अन्ना आंदोलन के समय बहुत सी प्रतिक्रियायें सुनने को मिलती थी उसमे से एक बहुत ही लोकप्रिय प्रतिक्रिया थी


“kisi ko kisi ke certificate se farak nahinpadta,sabko apna apna kam emandari se karna chahiye…!!!”

सुनने मे वाक्य बहुत अच्छा लगता है और एक नजर से देखने मे कोइ बुराइ भी नजर नही आती. हम सब इमानदार लोग अकसर इसी को मानते हुये अपना काम इमानदारी से करते रह्ते है, कई बार सोचे समझे बगेर की हम किस के लिये काम कर रहे है और क्यों कर रहे है. एक टेक्सी चालक किसी चोर और ह्त्यारे को जाने अनजाने इमान्दारी से अपने गंतव्य तक पहुचा देता है. अगर उसे मालुम हो की जिसे ले जा रहा है वो चोर है या डाकू तो भी क्या हम उससे व्यव्सायिक इमानदारी की उम्मीद करे. अगर यह जानते हुये की उसकी टेक्सी मे जो है बैठा है वो चोर है, बइमान है, या ह्त्यारा है उसके बाबजूद भी अगर कथित इमानदारी के तहत उसे उसके गंतव्य तक पहुचा देता है तो आप क्या कहेगे. इसी तरह अगर किसी होटल मे आने वाल व्यक्ति कोन है उससे होटल वाले को अगर कोइ मतलब ना हो और वो इमानदारी से उसकी सेवा करता रहे क्योंकी वो उसका बिल चुका सकता है. अगर आप को इस सब मे कोइ खराबी नजर नही आ रही है तो सभंल जाइये क्योंकी हमारी इसी व्यव्सायिक इमानदारी का या फिर भोलेपन का या अनजाने पन का लाभ कुछ लोग उठाकर हमारा ही वजूद खतरे मे डाल रहे है.

किसी भी आंतकवादी के हमले मे या फिर किसी भ्रष्ट की अकूत कमाइ मे हमारे जेसे इमानदारों की एक लम्बी कडी होती है. हम अपना काम शायद इस उम्मीद मे इमान्दारी से करते रहते है की उस बईमान की सजा खुदा देगा. या फिर बईमान को सजा देना का काम तो सरकार का है पुलिस का है...हम क्यों परवाह करें!

हथियार बनाने वाली फेक्टॅरी मे अगर कोइ काम इमानदारी से करता है और इसी के बनाये हथियार कोइ उसके विरूध इस्तेमाल कर देता है! एसे लोग लाखों मे है और हर गली महोल्ले मे है जो हमारे भोलेपन का , अनजानेपन का फायदा उठाना चाहते है.

समय तेजी से बदल गया है. अब सिर्फ हमारे खुद के इमानदार होने से ही काम नही चलेगा. हमे इस बत की भी तसल्ली  करनी होगी की जिस के लिये हम काम कर रहे है वो भी हमारी इमानदारी की कसोटी पर खरा उतरे. यह जानने की पूरी कोशिश करे की जिसके लिये हम काम कर रहे है उसका मकसद क्या है यह जानना अब हमारे जेसे इमान्दारों की सुरक्षा के लिये जरूरी है. नही तो मुबंई जेसे हादसे कभी भी और कंही भी होते रहेगें.

क्या हम किसी को सिर्फ इसलिये माफ कर सकते है की उसने अपना काम इमानदारी से किया था, अगर हां तो जब आपका अपाना कोइ हताहत होता है तब आप उन सब के खून के प्यासे क्यों हो जाते है जिनका उस घटना से कोइ सीधा सबंध ना हो.

आप यह बात अच्छी तरह समझ ले की कोइ भी आतंकवादी या भ्रष्टाचारी हमारे जेसे इमानदार की ही तलाश मे रहता है. एसा इमानदार जो उससे बिना कोइ सवाल किये बस उसका काम कर दे. और जब चाहे अपनी ओछी हरकत से उन्हे कभी भी अपने मकसद के लिये जब चाए भडका सके

Monday, May 20, 2013

घुमक्कडी से आलोकिक आनंद






आज तनाव, दबाव व घोर कंपीटीशन में खुद फंसे आदमी के लिये जरूरी सुविधाओं की लम्बी लिस्ट है जिसे पाने के लिये हम् दिन रात पागल की तरह लगे रहते है और प्रकृति प्रांगण में उपलब्ध मुफ्त अलौकिक आनंद का रसपान करना भूल जाता है क्योंकी सुविधाओं के मामले में हम सब लकीर के फकीर हैं। हमें हर जगह हर तरह की सुविधाएं चाहिये। कुदरत ने हमें अनेक अनमोल व अद्वितीय सुविधाएं दी हैं। इनके बिना हमारा काम नहीं चल सकता। दूसरे इन सुविधाओं का विकल्प भी नहीं है। इस बात को एक ट्रेकर ही अच्छी तरह समझ सकता है.

इसलिये भौतिक आराम को थोडे समय के लिये भूलकर व्यस्त जीवन से अपने लिये भी समय निकालकर प्रकृति के आंगन में सहज जीवन के निर्मल आनंद का कभी कभी सौम्य उत्सव मनाना ही चाहिये जिससे प्रकृति ने हमे जो अनमोल सुविधायें दी है उन्हे पहचान सके और सच्चे दिल से उसे सहजने का प्रयास करे.

हमारे शहर के आस पास फैली प्रदूषण मुक्त नयनाभिराम हरियाली, नीले खुले आसमान में पक्षियों की चहचाहट से भरपूर संगीतमय सुंदर पर्यावरण. प्राकृतिक के सबसे बडे HD TV .पर 7.1 sound system से भी कंही बेहतर वो भी सब कुछ सहज और मुफ्त में। इसलिये जीवन से बिजनेस, मोबाइल, अंधी प्रतियोगिता व कमरे मे लगे छोटे से HD TV चैनल्स को तिलांजलि देकर अपने ट्रेकर्स साथियों के साथ ट्रेकिंग का आनंद लेते रहना चाहिये। इस तरह की ट्रेकिंग हमें प्रकृति के करीब ले आती है। वन्य जन्तुओं की बहुरंगी दुनिया में पहुंचकर एक नवीन ताजगी का एहसास होता है और अपनी सारी थकान मिटाकर हम खुद को फिर से तैयार कर लेते हैं जीवन की संघर्षमय यात्रा के लिये।

Friday, May 17, 2013

स्वास्थ्य सेवाओं की आसमान छूती कीमतों से कमाती सरकार

स्वास्थ्य सेवाओं की आसमान छूती कीमतों के लिये रात दिन हम दवा निर्माता को कोसते रहते है और् यह भूल जाते है की हमारी लोकतांत्रिक सरकारे जिसका दायित्व सब के लिये स्वासथ्य, सुरक्षा और शिक्षा सुनिशिचित करना भी होता है वो चिकित्सा उपकरणों, दवाइयों और स्वास्थ्य सेवाओं से 40 से 50% तक टेक्स वसूल कर रही है. हां कभी कभी सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिये किसी इक्का दुक्का दवाइयों पर वो टेक्स मे छूट् भी दे देती है.
किसी मरीज के कुल चिकित्सकीय खर्च का करीब 60 से 70% प्रतिशत खर्च जांचो तथा सर्जिकल वस्तुओं का होता है. इनमे से अधिंकांश उपकरण आयात किये जाते है और उस पर केन्द्र और राज्य सरकारे जम कर टेक्स वसूल करती है. यह इस देश की विडंवना ही है की जिस मरीज का इलाज सिद्धांत: सरकार द्वारा मुफ्त होना था अब मुफ्त तो दूर, उसी इलाज पर बेशर्म होकर टेक्स बसूली कर रही है और अगर एसा है तो कफन चोर और एसी सरकारी व्यवस्था मे क्या अतंर हुआ?


जब आप दवा खरीदते है तो दुकानदार आपसे MRP मूल्य वसूल करता है. उस मूल्य मे टेक्स, मुनाफा, रायल्टी और कमिशन शामिल होता है. इसलिये सरकार की यह कारस्तानी आपको नजर नही आती. कई बार direct tax तो फिर भी पता चल जाये पर indirect tax के कारण कीमत पर पडा प्रभाव पता करना असंभव सा है.

सरकार के नेक नियति या वो स्वास्थय सेवाओं के प्रति कितनी गंभीर है का पता इस बात से चलता है कि जीवन उपयोगी चकित्सा उपकरणों और दवाइयों पर लगने वाले टेक्स की तुलना मे मोबाइल या आभूषण जेसी गेर जरूरी समान के आयात पर टेक्स कम वसूलती है. इसलिये सरकार के यह व्याख्या की सरकारे लोगों के भले के लिये होती है गले से नीचे नही उतरती. ये केसा भला की अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव मे मरीज तिल तिल मरता रहे.

घुलनशील स्टेंट हो या फिर घुटने या कुल्हे प्रत्यारोपित करने के लिये जोड़ ये सब आज आयातित होते है. यह पता होते हुये भी की यह मरीज के लिये जीवन रक्षक और बेहद जरूरी है मुझे नही लगता कि किसी भी सरकार ने उन पर लगने वाले टेक्स पर गंभीरता पूर्वक विचार किया हो. क्योकी अखिरकार उस टेक्स की भार तो उस मरीज को ही देना है.

अगर् चिकित्सकीय उपकरणों, जांच के उपकरण एवं प्रत्यारोपित किये जाने वाले यंत्रों की कीमत अत्याधिक होगी तो चिकित्सा सेवा सस्ती केसे हो सकती है क्योंकी इनके बगेर बगैर इलाज की कल्पना नही की जा सकती. जब इनकी कीमतें बढ़ी रहेंगी तो सस्ते इलाज की बात करना बेमानी ही है.

वर्तमान में इस व्यवसाय पर मूल्य नियंत्रण लागू नही होता. इस कारण इन्हें अनाप-शनाप मूल्यों पर बेचा जाता है एसा सोचना गलत है क्योंकी इस बात को समझ लें की अब मूल्य सरकार नही बाजार तय करता है. सरकारी मूल्य नियंत्रण एक दिखावा भर है. जिसका मकसद गरीबों के नाम पर किसी ओर का भला करना होता है. अच्छा हो की हम इस भर्म मे ना पडे. करोड़ों रुपये का निवेश करने के बाद कोई भी अधिक से अधिक लागत वसूलना चाहेगा. सीधी सी बात है की अगर लागत कम होगी को बेचने वाला मूल्य कम करने की सोच सकता है. इसलिये मूल्य नियंत्रण छोडकर सरकारे स्वास्थ सेवाओ मे इस्तेमाल हो रहे हर resource पर टेक्स निर्धारण करते समय गंभीरता से काम ले क्योंकी वो अधिक लागत का मुख्य वजह है..

कुछ लोग भाग्यशाली होते है की ज्यादा पेसे मे ही सही, उनके मरीज को समय पर उचित चिकित्सा मिलने से वो मरीज को बचा सके और इलाज करा कर उन्हे सकुश्ल वापस ला सके. वरना इस देश मे एसे हजारों मरीज इस लिये दम तोड रहे है की उन्हे समय पर सही चिकत्सिय सलाह उपल्ब्ध नही होती. इसलिये हम तो चाहते है की अपोलो जेसे उच्च स्तेरीय अस्पताल हर शहर मे हो. कम से कम सस्ते के नाम पर जो हर गली महोल्ले मे कब्र गाहे खुली है उनसे ये लाख गुना बेहतर है.

मुझे तो लगता है की आम नागरिक को शिक्षा और स्वास्थय देने मे सरकार पूरी तरह नाकाम रही. अब ना उस के पास बजट है और ना ही इच्छा शक्ति. अगर सरकार हर शहर को एक अच्छा अस्पलताल नही दे सकती तो कम से कम हम उन लोगों का होसला बुलंद करे जो अच्छे अस्पताल को बनने का कारण बनते है, क्योंकी अगर इलाज कराने किसी मरीज को दूसरे शहर इस वजह से जाना पडे क्योंकी वो इलाज उसके अपने शहर मे उपलब्ध नही है तो मरीजों के रिश्तेदारों की रात की नींद सिर्फ इसलिये हराम हो जाती है एक अजनबी शहर मे अपने काम धंधे को छोडकर केसे और कितने दिन मरीज का इलाज करा पायेगे,. इसी कारण से कई घर बरबाद हो चुके है.

जो लोग इन अस्पतालों की बुराइ मे लिख रहे है और जब अपनों पर या अपने पर गुजरती तो सबसे पहले इन अस्पतालों मे भर्ती होने के लिये खडे दिखाइ देते है उनसे मेरी यह विनती है...क्या उससे सस्ता और अच्छा कही है??? अगर है तो उसका भी अपने लेखों में जरूर उल्लेख किया करे.



Monday, May 6, 2013

Trekking Tips You Might Not Have Heard Elsewhere

1. Trek at your own pace. It's not a race. You're not here to compete with the rest of the group.
2. Do not leave the group and wander off alone. If you find you're lagging behind, try to pair up with a buddy.
3.As a extra precaution use good quality polythene bag to line your rug shacks from inside. This will ensure that incase your bag gets wet things inside bag will remain dry.
4. Trek with pros. They know what they're doing.
5. Never be the first person in a line of trekkers. You will also be the first person to walk into spider webs.
7. Never wear flat soled shoes.
8. Always wear wide rim hat to protect face from direct sun and rain.
9. While walking up or down a steep curving bend, it's less effort to walk around the outer edge of the bend, but also longer. It's a trade-off.
10. While walking down a slippery slope, either take long confident strides, or slow measured steps. In the former, you might fall down less, but fall hard. In the latter, you might fall down more often, but lighter. It's a trade-off.
11. While trekking, wear anti-perspirant, not deodorant. 
12. Have enough practice to ignite fire easily and effortlessly. Keep enough pieces of camphor as it is solid but highly inflammable nad helps a lot ingiting fire under wet conditions
13. If you're not a smoker, never trek with smokers.
14. Do carry food items which carry larger amount of carbohydrates.
15. At drink stops and lunch stops, take off your shoes and socks, take out your insoles from your shoes/boots and dry them in the sun, look after your feet and they will look after you.
16. Walking poles/ sticks, they ease the load on knees and thighs on descents and give you one extra leg’ on steep ascent and descent. They can also be used to help clear vegetation and have numerous uses in a campsite. Definitely one to try.
17.

Sunday, May 5, 2013

cool tips for a hot day


Ideas through brain storming…

simple tips...

1. Avoid direct sunlight exposure by wrapping your self light color preferably white cotton cloth

2. Where ever possible carry water bottle with sprinkler and moist your back of neck, and face and ear lobes by sprinkling water as it will help in keeping these most temperature sensitive parts at lower temprature. This will make you feel cooler preveent sun stroke

3. Use dark color polarized uv protected sunglass this will help your eyes protected from harmful uv radiation as well as from glare. it wil also make u feel cooler
4. Use large rim hat this will prevent direct sunlight striking your face.
5. Do not leave a fan on in an enclosed room when no one is present. A fan does not cool the air already in the room; in fact, it heats it. The fan's motor generates heat and even the circulating air creates a significant amount of heat from friction. It just feels cooler when you are present because of natural moisture evaporation from the skin, which only cools your body if you are in the room. Save electricity and turn off all fans in enclosed rooms that are not occupied

little complicated tips...

1. An interesting concept is to provide a comfortable, air-conditioned environment in a limited space for sleeping comfort. It saves the energy cost of needlessly air-conditioning a large space when your are only occupying a small space. The same idea could be used for the heating season with a small heater in the bed cubby. no wonder one can reduce heat load to 80%
2. in hot climates sleeping directly on the water bed bladder will be cooler. Remove all the coverings except for a sheet or two, and let the water conduct heat away from your body.

3. Roof being the major source for indirect heating of room.

a. Use Roof sprinkler system it will reduce cooling bills by keeping the roof cooler through water evaporation.

b. spread guny bag and moist it with water. This will help in keeping temprerature of roof cooler

c. Make thick carpet rolls from old news paper. Spread them over the roof in day time and roll back in evening. 

d. Arrange false roofing over the roof to creat enough gape for air circulation this will reduce roof temperature considerably

e. Use exhaust fan installed near the roof to remove hot air from room.

f. Avoid ceiling fan in room located on top floors, as it will circulate air which is already heated by heated roof. all over the room. Instead of that use pedestal fan at low RPM just enough to evaporate sweat from from us, as evaporation of sweat takes heat from our body.

g. force hot air on top floor as it and use pedestal fan

4. Most temprature sensitive parts in our body are 1. ear lobes, 2. neck, 3. feet, 4. wrist. 5. head. so if you are not able to cool down whole body to a comfortable temperature then make sure that at least these body surface are cooler. This can also save u from sun stroke.

5. While it is rarely a problem for individuals with good health due to over-hydration, but it is a possibility for individuals with heart, liver or kidney problems. If you have any serious health problems, be mindful of how much water you drink, since your kidneys may not be able to excrete an excessive amount of water properly.

6. Never leave children or pets in cars alone for any amount of time.

7. Babies, children, pregnant women, and the elderly are all much more prone to overheating than others. Be sure to keep an eye on members of your family, co-workers, and neighbors. Also, as you age, your body does not regulate temperature as well as it used to (even if you stay fit) and your skin may not be able to sweat. Be cautious and see if you can relax in an air-conditioned place for a while.

8. Heat is often the uncomfortable companion of drought. If there are water restrictions in your area, make sure you consider them before implementing any of the water-intensive suggestions like coolers and sprinklers.

9. In low humidity and water scare area houses are design to take advantage of difference in day and night temperature. Room construction is done with thick walls and material using low heat conductivity with no or very small windows,  windows and doors are kept closed in day time when out side temprature  is higher , and windows are open in night when outside temprature is lower.
these construction have small opening at roof top which regulates the air flow. It is closed in day time  and kept open in night. 
when out side ambient temperature is high due to bright sun light. Thick wall stop heat to enter in to the room and in night time when ouside temperature is low the opening on top of the roof is open so that outside cold air enter in to the room through doors and hot air in room leaves from the roof top opening. this type of construction is adopted in deserts . wall thickness can be as high as 2 meter. Made up of sand and mud.

post to add new ideas...this post will keep on adding ideas so. keep watch on it


HYPOTHERMIA

WHAT IS HYPOTHERMIA?
The second most sickness on mountain is Hypothermia. The body maintains a relatively stable temperature whereby heat production is balanced by heat loss. Normally, the temperature is 98.6 degrees F or 37 degrees C. When the outside environment gets too cold or the body's heat production decreases, hypothermia occurs (hypo=less + thermia=temperature). Hypothermia is defined as having a core body temperature less than 95 degrees F or 35 degrees C.
Body temperature is controlled in the part of the brain called the hypothalamus, which is responsible for recognizing alterations in the body temperature and responding appropriately. The body produces heat through the metabolic processes in cells that support vital body functions. Most heat is lost at the skin surface by convection, conduction, radiation, and evaporation. If the environment gets colder, the body may need to generate more heat by shivering (increasing muscle activity that promotes heat formation). But if heat loss is greater than the body's ability to make more, then the body's core temperature will fall.
As the temperature falls, the body shunts blood away from the skin and exposure to the elements. Blood flow is increased to the vital organs of the body including the heart, lungs, kidney, and brain. The heart and brain are most sensitive to cold, and the electrical activity in these organs slows in response to cold. If the body temperature continues to decrease, organs begin to fail, and eventually death will occur
During good weather conditions, you tend to ignore the weather. If it’s sunny, you’ll probably feel warm and neglect to carry proper clothing necessary in the event of inclement weather. You may even lack food and rudimentary shelter and equipment necessary for survival in an emergency. If the weather changes suddenly, or you or a member of your party is injured, you may find yourself unprepared to face such adverse conditions.
Hypothermia symptoms usually begin slowly. As you develop hypothermia, your ability to think and move often becomes clouded. In fact, you may even be unaware that you need help. As your thought process is impaired, you fail to realize that you are becoming colder. Once you get cold, it can be very difficult to get warm again.
Someone with hypothermia is likely to have frostbite as well.
The key hypothermia symptom is an internal body temperature below 95º F (normal is 98.6º F).
Usually, everyone thinks about hypothermia occurring in extremely cold temperatures, but that doesn’t have to be the case. It can happen anytime that you are exposed to cool, damp conditions. Older people are more susceptible to hypothermia. Two things to remember about hypothermia is that…
  • You don’t need to be experiencing sub-zero temperatures to encounter hypothermia.
  • Your judgment will be impaired making you much more likely to experience an accident.
If you, or someone in your group, become hypothermic, take immediate action before it becomes a severe emergency! If you observe ANY of these hypothermia symptoms or signs in yourself or anyone in your party, seek immediate help:


Hypothermia symptoms include:
  • Uncontrollable shivering (although, at extremely low body temperatures, shivering may stop followed by rigidity of muscle)
  • Weakness and loss of coordination
  • Confusion, Irrationality, poor judgment
    Pale and cold skin
  • Cyanosis (Blueness of Skin)
    Exhaustion or drowsiness- especially in more severe stages
  • Slowed breathing or heart rate
  • Stumbling
  • Thickness of Speech-Poor articulation of words
    Amnesia
  • Hallucinations
  • Loss of perceptual contact with environment
  • Dilation of pupils
  • Decreased heart and respiration
  • Slowness of pulse, irregular or weak pulse
  • Drop in body temperature below 95 F
  • Loss of consciousness
  • Numb hands or feet
  • In infants, symptoms include: Bright red, cold skin, Very low energy level
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Hypothermia can even be fatal, If not treated promptly, lethargy, cardiac arrest, shock, and coma can set in.
Get the person indoors Remove wet clothing and dry the person off, if needed Restore Warmth Slowly Warm the person's trunk first, not hands and feet. Warming extremities first can cause shock. Warm the person by wrapping him or her in blankets or putting dry clothing on the person. Do not immerse the person in warm water. Rapid warming can cause heart arrhythmia. If using hot water bottles or chemical hot packs, wrap them in cloth; don't apply them directly to the skin. If the person is not breathing normally: Begin CPR, if Necessary, While Warming Person Continue CPR until the person begins breathing or emergency help arrives. Give Warm Fluids. Give the person a warm drink, if conscious. but avoid caffeine or alcohol. Keep Body Temperature Up, Once the body temperature begins to rise, keep the person dry and wrapped in a warm blanket. Wrap the person's head and neck as well.
At the hospital, health care providers will continue warming efforts, including intravenous fluids and warm, moist oxygen.

Saturday, May 4, 2013

High Altitude sickness( HAPE / HACE)

Generally Trekkers comes for high altitude himalayan treks and they are not aware about altitude sickness. It affects people in areas of high altitude, which means areas at around 2,500m above sea level. Altitude sickness is more common, and becomes more severe, with increasing altitude.If you ascend to an area of high altitude, you are likely to experience some form of altitude sickness. Usually, the symptoms are mild and will improve if you descend. Altitude sickness is most likely to affect you if you ascend quickly – especially at a rate of more than 500m per day – or if you don't allow yourself time to get used to the height (acclimatise).

Acute mountain sickness (AMS) is the most common and mildest form of altitude sickness. If you go on a climbing expedition or stay in an area of high altitude, you may develop AMS. High-altitude pulmonary oedema (HAPE) and high-altitude cerebral oedema (HACE) are much more severe forms of altitude sickness. They usually affect you only if you are at very high or extreme altitude.

WHAT COUNTS AS HIGH ALTITUDE?

o High altitude refers to heights that are between 2,500 and 3,500m above sea level.

o Very high altitude is from 3,500 to 5,500m above sea level.

o Extreme altitude is from 5,500 to 7,500m above sea level.

SYMPTOMS OF ALTITUDE SICKNESS

You may notice symptoms of altitude sickness about six to 24 hours after you've arrived at an area of high altitude. However, this varies from person to person and will depend on the speed of your ascent. If you've been climbing or ascending slowly, the onset of your symptoms will be more gradual.

 IN ITS MILDEST FORM (AMS), YOU MAY:
• Have a headache
• feel tired
• feel sick or vomit
• lose your appetite
• feel dizzy
• have difficulty sleeping

Symptoms of AMS usually start to ease within about two days as your body acclimatises to the high altitude, particularly if you don't ascend any further. If your symptoms get worse, the best thing you can do is descend as quickly as possible. There are some medications that can help ease your symptoms and treat complications, but only descending will deal with the cause.

COMPLICATIONS OF ALTITUDE SICKNESS

If you ascend to an area of high altitude too quickly and don't allow your body time to acclimatise, you may develop a serious form of altitude sickness such as HAPE or HACE. These conditions are rare, but potentially fatal if you don't descend immediately and receive treatment.

  • HAPE occurs when fluid builds up in your lungs. Symptoms usually develop between two and four days after a rapid ascent over 2,500m. You may:

• Have a dry cough
• Feel breathless at rest
• Have a fever
• Feel confused
• Have pink or bloody spit
• Have a bluish tinge to your skin, lips and nails (cyanosis)
If you have severe symptoms of HAPE, you may gasp for breath and make gurgling sounds when you breathe.
HAPE can occur by itself or in conjunction with HACE. HACE occurs when excessive fluid collects in your brain, causing it to swell. Fewer than two percent of people with altitude sickness develop HACE and it rarely occurs below 4,000m. If you have HACE you may:
• Have a severe headache
• Feel very confused
• Lose co-ordination
• Have blurred or double vision
• Notice changes in your behaviour - for example, you may feel irritable or be unhelpful
• Lose consciousness
• Hallucinate (see, hear, feel and smell odd things that aren't really there)
• Fall into a coma (this is rare)
The symptoms of HACE may progress rapidly from mild to life-threatening within a few hours. If you have these symptoms, you should descend to a lower altitude as soon as possible and seek urgent medical advice. You may develop other symptoms at high altitude. For example, your face, arms or legs may swell up (peripheral oedema). This usually lasts a few days and then disappears. At altitudes of 5,000m and over, tiny blood blisters can form at the back of your eye (retinal haemorrhages), but you may not notice any symptoms and they only occasionally interfere with your vision.

CAUSES OF ALTITUDE SICKNESS
At high altitudes, the air is at a lower pressure than it is nearer sea level. This makes it harder to get oxygen out of the air you breathe in, and into your bloodstream. Your body responds by increasing your breathing and heart rate.

THERE ARE CERTAIN FACTORS THAT MAY MAKE YOU MORE LIKELY TO DEVELOP ALTITUDE SICKNESS; FOR EXAMPLE, IF YOU:
• Have had altitude sickness before
• Do strenuous activity or exercise at high altitude
• Rapidly ascend to high altitude
• Have a lung infection
If you have diabetes, or a heart or lung condition, you should check with your doctor before travelling to places at altitude. Many people with such conditions can cope very well but certain severe conditions may mean it's unwise for you to travel to, or climb in, areas of high altitude.

TREATMENT OF ALTITUDE SICKNESS
SELF-HELP-IF YOU HAVE THE SYMPTOMS OF AMS, YOU SHOULDN'T ASCEND ANY HIGHER. YOU SHOULD:

• Rest
• Make sure you drink enough fluids
• Take painkillers, such as paracetamol or ibuprofen if you have a headache
• Take ant sickness medicines, such as cinnarizine or promethazine, or other common anti-histamines to ease sickness and dizziness.
You can buy painkillers and ant sickness medicines from a chemist without a doctor's prescription. Always read the patient information that comes with your medicine and if you have any questions, ask your pharmacist for advice.

Oxygen
If your symptoms become more severe, you may need to breathe oxygen in through a face mask. You may also need hyperbaric treatment - this is where you enter a special, pressurised chamber to help get your oxygen levels back to normal.

Medicines
If you have the symptoms of HAPE or HACE, you may be able to take a medicine such as nifedipine or dexamethasone. Occasionally these drugs are given at location, particularly if you are unable to descend quickly and safely. The earlier they are taken, the greater their effectiveness.



Prevention of altitude sickness
There are a number of steps you can take to prevent altitude sickness. Wherever possible:
• Acclimatise yourself to high altitudes by slowly ascending over several days - if possible, don't sleep at an altitude more than 300m higher than the previous night
• Make sure you drink enough fluids
• Eat high-carbohydrate foods
• Don't do any strenuous exercise or activity for the first few days after you arrive at a high altitude and have rest days planned if you are ascending further

There are several medications you can use to prevent the symptoms of altitude sickness. A medicine called acetazolamide is being used more and more, but it isn't, however, a substitute for acclimatisation. Alternatively, you may be able to take a medicine called dexamethasone. This is effective for both prevention and treatment of altitude sickness and can prevent HAPE if you have suffered from severe altitude sickness before. If you have had HAPE before, your doctor may prescribe you a preventive drug such as nifedipine.

Ask a doctor from a travel clinic about these medicines because you can only get them on prescription. Always ask your doctor for advice and read the patient information that comes with your medicine.


Wednesday, May 1, 2013

अगर 'बोतल-किस' पर चांटा तो खाली-बोतल कही भी फेकने पर पिछाड पर लात क्यों नही?

आजकल बिसलरी पानी एक विज्ञापन टीवी पर दिखाया जा रहा है जिसमे इस बात पर जोर दिया गया की अपनी – अपनी बोतल से पानी पीओ अगर दूसरे की बोतल से मूंह लगाकर पानी पीओगे तो चांटा पडेगा!

किसी अपने ने अगर मूह लगाकर पानी पी भी लिया तो क्या हो गया? कोन सा पाप या अपराध हो गया! अगर पीने वाले के मूह मे कोइ खतरनाक संक्रमण नही है तो वो क्यों नही पी सकता.

प्यार मे चूमा चाटी जायज है क्योंकी इससे संक्रमण नही प्यार फेलता है...right!

अरे क्या खाक राइट.....अगर असली किस राइट तो बोतल किस wrong केसे?

बोतल से मूह लगाकर पानी पीना गलत केसे?

इस विज्ञापन मे यह तो बता दिया की पानी अपनी बोतल से पीओ पर यह नही बताया की जब बोतल खाली हो जाये तो उसका क्या करो. क्योंकी हम राजसी आदतों से मजबूर उसे कही भी फेंक देते और यह मानकर चलते है की सरकार का एक अदना सा आदभी जिसे सफाइ कर्मचारी कहते है उसे सही ठिकाने लगा देगा.

हमारे द्वारा फेंका गया यह कूडा आज पर्यावरण के लिये सबसे बडा खतरा बन चुका है. फिर भी यह हमे एक घूट पानी के लिये नई बोतल खरीदवाना चाहते है. अगर हम अब भी नही जागे तो हम मे और सूअर मे कोइ अतंर ना होगा. क्योंकी एक गंदगी और कचरे का आदी है और एक होने जा रहा है.

बुरा लगा ना! मुझे बुरा भाला कहने से पहले अपने आस आस फेले कूडे कचरे पर जरा नजर डालो. नदी हो या नाले सब पर इन बोतलों को तेरता देखो और सोचो कोन देगा हमे इससे निजात? शायद हमे अब भी इसकी भयावहता का सही अदांज नही है! हमे अपनी आदते सुधारनी होगी, गलत धारणाओं को पनपने से रोकना होगा.

जेसे जर्मन रोज का सामान खरीदने के लिए अपनी थैलियां अक्सर साथ में लेकर जाते हैं. और अगर वो नहीं ले गए हैं तो सुपर मार्केट में प्लास्टिक, कागज या कपड़े की थैली के लिए आपको कम से 10 सेंट से एक यूरो तक पैसे चुकाने होते हैं. कई दुकानों में रखी कपड़े की थैली वापिस करने पर आपको दिए हुए पैसे वापिस मिल जाते हैं.


बीयर  या फिर जूस खरीदते समय  ग्लास या प्लास्टिक की बोतलों पर कुछ पैसे डिपॉजिट किए जाते हैं जो आठ सेंट से 25 सेंट के बीच होते हैं. जब आप ये बोतलें लौटाते हैं तो पैसे वापिस मिलते हैं. 25 सेंट की चार बोतलें एक यूरो और एक यूरो की रुपये में कीमत कम से कम 65 रुपये.

अगर एसा हमारे यंहा भी हो सके

 क्यों ना हम भी बोतल बेचने वालों को ही खाली और बेकार बोतलों को सही ठिकाने पहुचाने की जिम्मेदारी दे. आसान सा विक्ल्प ...खाली बोतल वापस करो और उसके बदले नई बोतल की कीमत मे रियायत पाओ.
मुझे याद है दूध की बोतल को बार बार इस्तेमाल किया जाता था. यहां तक की कोला और पेप्सी को भी बोतलों को बार बार इस्तेमाल करता था. पर उस को आधुनिकता और स्वास्थ के नाम पर बंद क दिया गया.

  कचरे को उसके प्रकार के आधार पर अलग अलग डिब्बों मे डाला जाये जिससे उसके सही निराकरण मे असानी हो. जो मिक्स कचरा डाले उस पर भारी जुर्माना हो और इस जुर्माने की जिम्मेदारी समाज की हो..हर काम हम सरकार पर नही डाल सकते. कुछ काम हमे भी करने होंगे. बच्चों को पर्यावरण के प्रति किताबी ज्ञान सीखाने की जगह हमे खुद एक उदाहरण बनना होगा.


आज हम पानी के फुट प्रिंट की बात करते है, कार्बन फुट प्रिंट की बात करते है अब जरूरत है की अब पोलीथीन और प्लास्टिक फुट प्रिंट की भी बात करे जो हमारे पर्यावरण, नदी नालों और तालाबों के लिये खतरा बन गये है.


आगे आपकी मर्जी....