Sunday, December 31, 2017

1 जनवरी 2018

1 जनवरी 2018 को मुझे whats app पर यूं तो सेकडो मेसेज मिले जो शुभकामनाओं के संदेश से भरे हुये थे. उनमे एक मेल एसा था जो उन सब से अलग हटकर था.  इस मेसेज  को मेरे एक अजीज दोस्त ने बिना सोचे समझे भावनाओं मे बहकर मुझे फारवर्ड कर दिया था मे भी इसे बिना सोचे समझे आगे फारवर्ड कर सकता था पर एसा नही कर रहा हू नव वर्ष की शुरूआत एसे मेसेज से करने का मन नही हो रहा है. आगे कुछ लिखू उससे पहले आप भी इस मेसेज को पढ ले और अपनी समझ बना लें.
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कृपया नीचे लिखे सन्देश को बहुत ही गम्भीरता से पढ़ें और अपनी संस्कृति की झलक को देखेमनन करे।यदि अच्छा लगे तो आगे शेयर भी करे :- 🙏

जनवरी को क्या नया हो रहा है ?

न ऋतु बदली.. न मौसम
न कक्षा बदली... न सत्र
न फसल बदली...न खेती
न पेड़ पौधों की रंगत
न सूर्य चाँद सितारों की दिशा
ना ही नक्षत्र।।

जनवरी आने से पहले ही सब नववर्ष की बधाई देने लगते हैं। मानो कितना बड़ा पर्व है।

नया केवल एक दिन ही नही होता.. 
कुछ दिन तो नई अनुभूति होनी ही चाहिए। आखिर हमारा देश त्योहारों का देश है।

ईस्वी संवत का नया साल 1 जनवरी को और भारतीय नववर्ष (विक्रमी संवत) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। आईये देखते हैं दोनों का तुलनात्मक अंतर: 

1. प्रकृति- 
जनवरी को कोई अंतर नही जैसा दिसम्बर वैसी जनवरी.. चैत्र मास में चारो तरफ फूल खिल जाते हैंपेड़ो पर नए पत्ते आ जाते हैं। चारो तरफ हरियाली मानो प्रकृति नया साल मना रही हो I

2. वस्त्र- 
दिसम्बर और जनवरी में वही वस्त्रकंबलरजाईठिठुरते हाथ पैर.. 
चैत्र मास में सर्दी जा रही होती हैगर्मी का आगमन होने जा रहा होता है I

3. विद्यालयो का नया सत्र- दिसंबर जनवरी वही कक्षा कुछ नया नहीं.. 
जबकि मार्च अप्रैल में स्कूलो का रिजल्ट आता है नई कक्षा नया सत्र यानि विद्यालयों में नया साल I

4. नया वित्तीय वर्ष- 
दिसम्बर-जनबरी में कोई खातो की क्लोजिंग नही होती.. जबकि 31 मार्च को बैंको की (audit) कलोसिंग होती है नए वही खाते खोले जाते है I सरकार का भी नया सत्र शुरू होता है I

5कलैण्डर- 
जनवरी में नया कलैण्डर आता है.. 
चैत्र में नया पंचांग आता है I उसी से सभी भारतीय पर्वविवाह और अन्य महूर्त देखे जाते हैं I इसके बिना हिन्दू समाज जीबन की कल्पना भी नही कर सकता इतना महत्वपूर्ण है ये कैलेंडर यानि पंचांग I

6. किसानो का नया साल- दिसंबर-जनवरी में खेतो में वही फसल होती है.. 
जबकि मार्च-अप्रैल में फसल कटती है नया अनाज घर में आता है तो किसानो का नया वर्ष और उतसाह I

7. पर्व मनाने की विधि- 
31 दिसम्बर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर मदिरा पान करते हैहंगामा करते हैरात को पीकर गाड़ी चलने से दुर्घटना की सम्भावनारेप जैसी वारदातपुलिस प्रशासन बेहाल और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश.. 
जबकि भारतीय नववर्ष व्रत से शुरू होता है पहला नवरात्र होता है घर घर मे माता रानी की पूजा होती है I शुद्ध सात्विक वातावरण बनता है I

8. ऐतिहासिक महत्त्व- 1 जनवरी का कोई ऐतेहासिक महत्व नही है.. 
जबकि चैत्र प्रतिपदा के दिन महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् की शुरुआतभगवान झूलेलाल का जन्मनवरात्रे प्रारंम्भब्रहम्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना इत्यादि का संबंध इस दिन से है I

अंग्रेजी कलेंडर की तारीख और अंग्रेज मानसिकता के लोगो के अलावा कुछ नही बदला.. 
अपना नव संवत् ही नया साल है जब ब्रह्माण्ड से लेकर सूर्य चाँद की दिशामौसमफसलकक्षानक्षत्रपौधों की नई पत्तियाकिसान की नई फसलविद्यार्थी की नई कक्षामनुष्य में नया रक्त संचरण आदि परिवर्तन होते है। जो विज्ञान आधारित है I

अपनी मानसिकता को बदले I विज्ञान आधारित भारतीय काल गणना को पहचाने। स्वयं सोचे की क्यों मनाये हम 1 जनवरी को नया वर्ष..?

"केबल कैलेंडर बदलें.. अपनी संस्कृति नहीं"

आओ जागेँ जगायेँभारतीय संस्कृति अपनायेँ और आगे बढ़े I
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अगर मे इस मेसेज को फारवर्ड करू तो ही मै एक सच्चा हिन्दू कहलाउगा या हो सकता है की कल वो मेरी देश भक्ति को लेकर भी सवाल उठायें. एसे ही सेकडो मेसेज इन दिनों सोशल मिडिया पर छाये हुये है जो समाज को जोड नही वरन बांट रहे है इसे राजनितिक भाषा मे समाज और देश का polarization कहते है  आजकल एसा ही कुछ हो रहा है. हम चाहे या अनचाहे इस का हिस्सा बनते जा रहे है. कुछ लोग हमारी भावनाओं को भडकाने की पुर जोर कोशिश कर रहे है. अधूरा सच या आधा सच बताकर लोग अपनी दुकान चला रहे है.
अफसोस हम और आप भी अनजाने मे इसका हिस्सा बन जाते है. 1 जनवरी को खुश होने के मेरे अपने कारण है. कुछ कारण मे नीचे लिख रहा हू, जरूरी नही की आप मेरी सारी बातों से सहमत हों. पर मुझे मेरी बात को शांती पूर्वक कहने का हक तो है ही,   
1. मै अंग्रेजी कलेंडर को मानता हू क्योंकी मै इसे आसानी से समझता हू. यह सारी दुनिया मे सबसे ज्यादा प्रचलित और आसानी से समझ मे आने वाला कलेंडर है. 
2. धर्म और देश से परे मानवता का अहसाहस... कराने वाले इस दिन को मे खुशीपूर्वक मनाता हू और सब की खुशियों और दुआओं को कबूल करता हू. यह वो दिन है जब हम देश, धर्म और जाति से परे खुश होने कारण बनते है. .सारी दुनिया एक साथ इस दिन को मनाती है....एक मानवीय अहसाहस.
3. यह उस संस्कृति के प्रति आदर है जिसने हमे वैज्ञानिक सोच दी. पढने लिखने की आजादी दी. वरना हम ढोर गंवार ही रह जाते.
4. ब्रह्मा विष्णु महेश ...जिसका आदी है ना अंत. वो सब तो समय से परे है उसका तारीख और कलेंडर से कोइ लेना देना नही है. यह तो परम चेतना है जो उर्जा और पदार्थ के संचालन की  नियंता है. दुनिया मे सेकडो प्रकार के  कलेंडर है जिसके जन्म का कारण, उसे बनाये रखने और फिर खत्म होने का कारण  यही ब्रह्मा विष्णु महेश है. यह मात्र  विक्रम कलेंडर का ट्रेड मार्क केसे हो गया. सृष्टी की शुरूआत इस दिन से हुई यह आप की मान्यता हो सकती है... पर जिसका ना कोइ आदी है ना अंत उसकी शुरूआत इस दिन से हुई यह केसे मान लिया जाये.  वेसे इस बारे मे विस्तार से चर्चा फिर कभी.
5. भारतीय स्कूल कालेज के सत्र से  ना तो 1 जनवरी से कोइ नाता है ना विक्रम कलेंडर से.  31 मार्च से विक्रम कलेंडर कब से शुरू होने लगा ?
6. पोधों की नई पत्तियों को लेकर भी थोडा सोचिये... जम्मू से कन्याकुमारी तक यह समय अलग अलग है. और जब सारी दुनिया की बात हो तो .... हर दिन नई पोध उगती है और कटती है. सारे ब्रहमांड  की बात करते हो और सोच को मध्य भारत तक ही सिमित कर देते हो  और उसमे भी एक विशेष धर्म को.    
7. यह बात सही है की लगभग सारे भारत मे यह फसल तैयार होने का समय होता है. पर फसल दाता किसान अब फसले देखकर खुश नही होता...उसे तो इस बात की चिंता सताये रहती है की बजार मे उसे उसकी फसल के सही दाम मिलेगे या नही, या उसे भी आत्म हत्या करनी होगी. काश यह उनके लिये सही मायने मे जश्न का समय होता खुश होने का दिन होता. काश उसे सरकारी सब्सिडी पर जिंदा ना रहना पडे, उसे फसल के सही दाम मिल पाये. जिस दिन एसा हो जायेगा असल मे वो दिन किसान के लिये सही मायनों मे नया साल होगा  
8. अफसोस आप को शादी ब्याह मे दारू दिखाई नही देती...होली दिवाली  पर भी दिखाई नही देती... नव वर्ष मे यह आप को दिखाई दे रही है. अरे भई इस दिन लोग सच मे खुश होते है... और खुशी खुशी जाते साल की विदाई और आने वाल का स्वागत करते है. दारू का इससे बस इतना ही संबंध है की यह खुशी जाहिर करनी का उसे दोस्तों के साथ  मनाने का साधन है. इससे अच्छा साधन कोइ और मिलेगा तो लोग उसे अपना लेगे. जब तक  कोइ और  साधन नही है तो लोग दारू से ही काम चला रहा है  अब इसमे आप को क्या परेशानी हो गई.
दारू और मदिरा से दिखावे का विरोध...अरे इसके बिना भी कोइ जश्न होता है क्या.  देखा नही सरकारे केसे हर गली और नुक्कड पर दारू की दुकान खोलने मे लगी हुई है. अगर मै गलत नही हू तो इससे होने वाली कानूनी और गेर कानूनी कमाई से सरकारे चल रही है.  अरे मे मजाक नही कर रहा हू...देखा नही केसे पुलिस दारू की दुकानों का विरोध करने वालों पर लाठी चार्ज करती है.
मेरे जेसे करोडो अरबों लोग है जो बिना दारू के  नव वर्ष  मनाते है , पर क्या करे इस बात की कोइ चर्चा ही नही करता. क्या पता कल इसी बात को लेकर कोइ मुझे देश द्रोही ना कह दे हमारे जेसे लोग सरकार का नुकसान जो कर रहे है .
9. उपवास सेहत के लिये भले ही अच्छा हो पर  इसे लोग खुशी के साथ नही जोडते. अगर  आप ने उपवास किया हो तो पता होगा की यह असल मे कितना कष्ट कारी अनुभव होता है. नये साल मे और उपवास बात हजम नही हो रही है.  

10. वसुधैव कुटुम्बकम् सनातन धर्म का मूल संस्कार तथा विचारधारा है जो महा उपनिषद सहित कई ग्रन्थों में लिपिबद्ध है। इसका अर्थ है- धरती ही परिवार है (वसुधा एव कुटुम्बकम्)। यह दिन इस वाक्य को याद करने का दिन है. एक साथ खुश होने का दिन है. यह हिन्दू होने का दिन नही है....यह मानव होने का दिन है. बाकी 364 दिन आप हिन्दू रहिये, हिन्दूस्तानी रहिये  कोन रोक रहा है. 


  

Monday, June 5, 2017

जय पर्यावरण...जय हो उसे उसे मनाने वालों की


यह लेख उन  जिम्मेदार नागरिकों को  समर्पित है जो पोलीथीन को नंबर एक दुश्मन घोषित करने के लिये कमर कस चुके है. गुजारिश है की एक बार इस लेख को पूरा पढे और उसके बाद सही निर्णय लें.  
पैपर बेग, जूट बेग या फिर पोलीथीन बेग मे से कौन सा बेहतर विकल्प है. आज पोलीथीन को दोषी करार दिया गया है. अब आप पैपर  बेग को इस्तेमाल के बाद उसे कचरे मे फेंकने को आजाद है पर पोलेथीन को फेंका तो कडी सजा.  आज सारे प्रयावरण वादी और सरकारें एक साथ पोलीथीन के विरूध उठ खडे हुये है, और बहुत से राज्यों की तरह मध्यप्रदेश मे भी पोलीथीन बेग के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है.  इसे इस्तेमाल करने वालों के विरूध  कडी सजा का प्रावधान किया जा चुका है.  
एक बार फिर 5 जून को मनाये जाने वाले पर्यावरण दिवस पर मेरी कोशिश दोनों के बारे मे उपलब्ध जानकारी का विशलेषण करने की है जिससे आप सभी अपने स्तर पर सही निर्णय ले सकें. जब भी पोलीथीन और पैपर/जूट बेग के बीच चुनने की बात आती है तो आजकल पैपर और जूट बेग के इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है. इसके पक्ष मे दलील दी जाती है की पैपर /जूट बेग बायोडिग्रडेबल है और इसे रिसायकल भी किया जा सकता है, वंही पोलीथीन बायोडिग्रडेबल नही है. इसे अगर जानवर, चिडिया  खाले तो उसकी जान पर बन आती है. यह नालियां चोक कर देती है नदी और तालाब को गंदा कर पर्यावरण के लिये गंभीर खतरा बन जाती है. यह गंदगी हमारी आंखो को खटकती है. इधर उधर बिखरी पोलीथीन की पन्नियां भला किसको अच्छी लग सकती है.
प्लास्टिक केरी बेग पोलीथीन से बनाया जाता है. दुनिया भर में इसे खाद्य पदार्थ, दवा, और पानी को स्टोर करने के लिये सुरक्षित माना गया है. भारत में भी BIS मानक (refer IS 10146:1982 Reaffirmed on Feb-2003). के अंतर्गत इसे सुरक्षित माना गया है.   पोलीथीन Recyclable, reusable, light-weight, high strength, low carbon and water footprint, tear resistent, space saving, bacteria resistant, waterproof and tear resistant, सस्ता, सास्थ्यकरप्रयावरण के लिये सुरक्षित, कम उर्जा खपत के साथ साथ पैपर या जूट बेग से बहुत सस्ती होने के बावजूद यह आज हमे पर्यावरण की दुशमन नम्बर वन नजर आ रही है.
पोलीथीन रैपर और पैकिंग मिठाइ, नमकीन, ब्रेड, केक, बिस्कुट उद्योग और खान पान से जुडे दूसरे व्यवसाय जिसमें खाद्य पदार्थ को सुरक्षित रखना हो तो उसे पोलीथीन पैक किया जाता है. इसे आसानी से वेक्यूम् और नाइट्रोजन फिल पैक में भी बखूबी इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके इस्तेमाल से खाद्य पदार्थ अब 6 महिने तक आसानी से स्टोर किया सकता है. हमारे देश और अन्य विकासशील देशों मे 10% से 15% प्रतिशत खाद्य पदार्थ खराब पैकिंग और स्टोर की वजह से खराब हो जाता है.  इसकी वजह से सीधा नुकासान तो होता ही है इसके सडने की वजह से निकली मिथेन और कार्बनडाइओक्साइड गेसों के कारण ग्रीन हाउस प्रभाव पर्यावरण पर उल्टा प्रभाव डाल रहा है. इस सच को हम नकार नही सकते की पोलीथीन रैपर के कारण आसानी से  खराब हो जाने वाले खाद्य पदार्थ को भी अब अधिक दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है. दूर दराज के इलाकों मे इसे सुरक्षित पहुचाया जा सकता है. बाढ और भूकंप जैसी प्राकृतिक विपदा के समय पोलीथीन पैक सुरक्षित खाद्य सामग्री, पानी, दवाइयां जीवनरक्षक का काम करती है.
यह सच है की आज पालीथीन पर्यावरण के लिये खतरा साबित हो रही है, पर क्या इसके लिये हम पूरा दोष पालीथीन को दे सकते है? सच है की जो जानवर इसे खा जाते है उनके जीवन के लिये खतरा साबित होती है इससे नालियां चोक हो जाती है. इधर उधर बिखरी पालीथीन की पन्नियां  देखने मे किसी को भी अच्छी नही लगती.
पर यह तो पोलीथीन निष्पादन का दोष हुआ क्योंकी हम शान से इसे कंही भी फेंक देते है जेसे आजाद देश मे हमारा यह जन्म सिद्ध अधिकार हो. इसे सही ठिकाने लगाने का काम नगर निगम का अदना से सफाइ कर्मचारी को दे दिया गया है. वो गरीब भी क्या करे बायोमास के बदबूदार कचरे मे से वो पन्नियां केसे अलग करे?
 मजबूरी मे वो भी इसे अनदेखा कर कूडे के ढेर पर पटक देता है या फिर यहां वहां उडती हुई पन्नियां कभी नाली को जाम कर देती है कभी नदी तलाबों के तैरती नजर आती है. जिस पोलीथीन को आसानी से रियासकल किया कजा सकता था हमारी गलत आदतों के कारण हमारे लिये खतरा बन गई.
इसके लिये हम अपनी आदतों को सुधारे या फिर अपनी शाही आदर्तों को बरकरार रखते हुये पैपर और जूट बेग को अपना कर उस से बढे खतरे को अपने गले लगा लें! हमारी इस बेवकूफी को सही निराकरण पर्यावरणवादी और पर्यावरण को समर्पित हमारी सरकार को कागज या जूट से बने बेग के उपयोग मे दिखाइ देता है. इसे इस्तेमाल करो और फिर सडने के लिये इसे कंही भी फेंक दो यह जाने बिना की जब यह सड्ता है तो पर्यावरण का ज्यादा नुकसान करता है. यह नुकसान हमे समझ मे नही आता क्योंकी हमे दिखाइ नही देता. पोलीथीन पन्नियां हमे दिखाइ दे रही है शायद इसलिये हमारी आंखो मे ज्यादा खटक रही है.
यह सही है की पैपर रिसायकल हो सकता है पर क्या आपको मालुम है कि हमारे नदी नालों को प्रदूषित करने मे पैपर उद्योग का बडा हाथ है. सच तो यह है की पैपर या जूट बेग पोलीथीन से कंही बडा खतरा है क्यों विशवास नही होता ना? गूगल करो और खुद जान जाओ. 
पैपर उद्योग को बढावा यानी जंगलों का और तेजी से सफाया. प्लास्टिक बेग की तुलना में  जूट या पैपर् बेग की बनाने में तीन गुना ज्यादा उर्जा की खपत होती है. इसके बावजूद जब जूट बेग के सडने से  मिथेन और कार्बनडाइओक्साइड गेसें निकलेगी उसका दुषप्रभाव क्या होता है यह भी हम सब को मालूम है.
बुराइ पोलीथीन बनाने या इस्तेमाल में नही है बल्की इसके इस्तेमाल करने के बाद उसके निस्पादन के तरीके मे है. हम खराब आदत से मजबूर कचरे को मिक्स कर देते है यानी की बायो कचरे के साथ प्लास्टिक कचरा जिसे बाद मे अलग करना असंभव हो जाता है या फिर बेहद मंहगा साबित होता है. हम यह समझ लें की प्लास्टिक बेग अपने आप मे इतनी बडी समस्या नही की उसकी जगह हम पैपर बेग या जूट बेग को इस्तेमाल करने को मजबूर हो जाये समस्या की जड तो हमारी गलत आदत है.
लोगों द्वारा कूडा कचरा केसे भी और कंही भी फेंक देने से रोकने का काम किसका है. क्या इसके लिये भी हम को पुलिस का डंडा चाहिये. क्यों नही उस क्षेत्र की साफ रखने की नैतिक जिम्मेदारी उस जगह के आसपास या उसका उपयोग करने वालों के उपर डाली जाये. और जो ना करे उस पर भारी जुर्माना. यूरोप और अमेरिका, सिंगापुर, जिन शहरों की सफाइ की दुहाइ हम देते है वंहा गंदगी फेलाने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है. इसी जुर्माने की डर से लोगों ने कचरा सही तरह से ठिकाने लगाना शुरू किया और अब वो उनकी आदत बन गया है.
अगर पोलीथीन को कंही भी फेकने की जगह उसे सही कचरे के डिब्बे मे डाला जाये तो समस्या ही नही बचती. अगर सफाइ कर्मचारी मिले जुले कचरे को उठाने से ही मना कर दे और रहवासियों को कचरे के किस्म के अनुसार अलग अलग डिब्बे मे डालने पर जोर दे तो समस्या ही ना रहे. क्या आपको पता है की पालीथीन और प्लास्टिक कचरे से कमाइ हो सकती है. अगली बार भंगार वाला  जब आपकी गली में आवाज लगाये तो उससे इस बारे मे बात करके देखना.
हम सब को मालुम है की पोलीथीन और प्लास्टिक पेट्रोलियम उत्पाद से बनते है, वही जिससे पेट्रोल और डिजल बनता है. 93% पेट्रोलियम इधंन के रूप में इस्तेमाल होता है मात्र 4% ही प्लास्टिक या पोलीथीन बनाने मे इस्तेमाल होता है. हर बार बहस का मुद्दा होता है की प्लास्टिक और पोलीथेन का इस्तेमाल होने के बाद उसके कचरे का निस्पादन केसे होगा. अगर 4% प्लास्टिक कचरे को अंत भी इधन के रूप् मे जला दिया जाये तो क्या बुराइ है!
पोलीथीन को पूरी तरह से रिसायकल किया जा सकता है, अब तो प्लास्टिक और पोलीथीन कचरे को सडक बनाने मे भी इस्तेमाल होने लगा है और उसके उतसाहवर्धक नतीजे मिल रहे है.
याद रहे पैपर और जूट उद्योग का पानी के स्र्तों को दूषित करने में बडा हाथ है. आजकल पैपर बेग या पैपर कोन/ ग्लास को बनाने मे एसे पदार्थों का इस्तेमाल होता है जो इसे तुरंत सडने से रोकते है, इसके कारण यह भी नालियों को चोक करते है. सडे-गले कागज से मिथेन उत्सर्जित होती है जो कार्बनडाइओक्साइड  से 20 गुना ज्यादा हानीकारक है. पैपर बेगे के पक्ष मे कहा जाता है की पैपर रिसायकल किया जा सकता है. पर क्या आपको मालूम है रिसायकल पैपर नये पैपर से ज्यादा मंहगा होता जिसे सरकारी अनुदान देकर सस्ता किया जाता है. माना की  रिसायकल पैपर को बनाने में नये पैपर की तुलना मे कम पनी की खपत होती है. पर इंधन की खपत करीब 31% ज्यादा होती है.
मै मानता हू की हमारी बहुत सी पर्यावरण  समस्याओं की तरह पोलीथीन / पैपर बेग की समस्या का हल आसान नही है, पर हम सब के सम्मलित पर ठोस प्रयास अच्छे नतीजे ला सकता है. अपनी आदतों मे थोडा सा सुधार लाकर हम पोलीथीन को अपना और पर्यावरण का दोस्त बना सकते है. इसके लिये हमे, हमारी कचरा फेलानी की नबाबी आदत से निजात पानी होगी. कचरा निस्पादन के लिये उचित प्रबंधन पर ध्यान देना होगा. देखा जाये तो शहरो द्वरा उत्पन्न कचरे मे मात्र 5% ही प्लास्टिक कचरा होता है. बाकी का कागज, मिट्टी, डायपर्स बायोमास होता है इसलिये पोलीथीन पर रोक इसका सही इलाज नही है उल्टा इसके बंद होने से स्थति और बिगडेगी. इसका सही इलाज हम सब मे उचित आदत का विकास है, जो कचरे को उसके प्रकार के अनुसार सही डिब्बे मे डाले और सही समय पर और सही तरीके से कचरे का प्रबंधन करे. जेसे बयोमास से बनी अच्छी खाद से हाजारों करोड रूपये की बरबादी को सीधे सीधे बचाया जा सकता है.
हम प्रण लें की :

1.     हम  पोलीथीन और पैपर बेग के अति प्रयोग से बचेगें.
2.     पैपर पैक की जगह पोलीथीन को प्राथमिकता देगें पर उसके निस्पादन को भी सुनिन्श्चित करेगें. जब पोलीथीन बेग का सही निस्पादन करने में संदेह हो, तो ही हम पैपर बेग का इस्तेमाल करेगें.
4.    कचरे को उसके प्रकार के अनुसार सही कचरे के डिब्बे मे डालेगें.
5.     अच्छा हो की दुकानदार केरी बेग के लिये ग्राहक से पूछे. जब तक ग्राहक ना मांगे उसे पोलीथीन या पैपर बेग देने से बचे. अगर ग्राहक पोलीथीन या पैपर बेग मे लेने से मना कर घर से लाये अपने बेग मे सामान ले  तो उसे धन्यवाद दें.
6.     सामान की अतिरिक्त पैकिंग से बचे. हम अकसर पहले से ही पैक किये सामान को एक बेग में और फिर वो बेग दूसरे बेग मे डालते है, जब की उस सामान को कुछ दूर खडी गाडी में रखना भर होता है.
7.     हमारी गलत आदतों के कारण सरकारी एजंसियों को मजबूरन बाजार मे 40 माइक्रोन से कम मोटाइ की पोलीथीन बेग पर रोक लगानी पडी जबकी 10 से 15 माइक्रोन की पोलीथीन भी एक सामान्य पैपर बेग का आसानी से मुकाबला कर सकती है. बस हमे इतना करना है की इस्तेमाल के बाद उसे सही कचरे के डिब्बे मे डालें.  
8.     हम कचरे को पोलीथीन में डालकर उसे सीधे कचरे मे डाल देते है. एसा कभी ना करें. पोलीथीन बेग के कचरे को उसके सही कचरे के डिब्बे मे डालने के बाद पोलीथीन को भी उसके लिये किये गये नियत डिब्बे मे डाल दें.
9.     हम अकसर घरों मे पैदा होने वाले कचरे को पोलीथीन मे भर देते है और फिर उस कचरे को पोलीथीन के साथ ही कचरे की डिब्बे डाल देते है. जो गलत है. इससे पोलीथीन और बायोमास एक साथ मिसक्स हो जाता है जिसे बाद मे अलग नही कर पाते. हमें पोलीथीन मे मोजूद गंदगी को उसके सही कचरे के डिब्बे मे डाल कर पोलीथीन को भी उसके सही कचरे के डिब्बे डालना चाहिये.

10.  100% रिसायकल हो सकने वाली पोलीथीन का फायदा समाज को दें.

Sunday, June 4, 2017

पर्यावरण दिवस

हम एक बार फिर पर्यावरण दिवस मना रहे है. आज फिर लफ्फाजी का दिन है बडी बडी हांकने का दिन है. यह बताने का दिन है की जगंल और शेर खतरे मे है और अगर वो खतरे मे है तो हम खतरे मै है. पानी की बरबादी सूखा लायीगी...भयंकर सूखा. यही सब सुनकर और सुनाकर इस दिन को मनाया जाता है. पिछले कुछ समय से 1 घंटे के लिये बिजली बन्द करने का चलन भी शुरू हुआ है. जेसे हम किसी को श्रृद्धाजंली दे रहे हो. आज मै ना कुछ एसा करूगा ना ही सुनुगां. कुछ अलग करने का मन है, आज कोइ बडी बातें नही, बस आत्मावलोकन की जो मै कर रहा हू क्या उससे अच्छा कर सकता हू.
छोटे छोटे पर ठोस कदमों को प्लान करने का मन है. कुछ एसे कदम जो मेरे आसपास के माहोल को कुछ ओर अच्छा बना सके मुझे बेहतर बना सके. मेरा  बदमाश मन उकसाता है की तुम्हारे एक के अच्छे हो जाने से या कुछ अच्छा कर देने भर से दुनिया नही बदल सकती. अरे... मै दुनिया की नही अपने आसपास के माहोल की बात कर रहा हू...वेसे भी मै अकेला कंहा हू मेरी तरह लाखों करोडो लोग है जो कर रहे है और मै उनमे से एक बनना चाहता हू जो बोल कर नही करके दिखा रहे है.
1.    साल मे कम से कम 2 बडे पेड लगाउगा और पक्का करूंगा की वो फले फूलें.
2.    धीरे धीरे सोलर आधारित उर्जा इस वर्ष 200 वाट और फिर प्रति वर्ष 200 वाट जोडते जाना है.
3.    घर की कम से कम एक लाइट को प्रतिमाह को रेगुलेटड LED लाइट में बदलना है.
4.    ह्वाइ यात्रा मैं कम से कम 25% कटौती जब जरूरी हो तभी करू.
5.    कूलर और एसी में प्रतिदिन 1 घंटे की कटौती
6.    एसी का तापमान 28 deg-C
7.    कम से कम 70% पोलीथीन रिसायकिल्, कम से कम 25% पोलीथीन को खुद रिसायकिल करूंगा
8.    माह में कम से कम एक बार पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग
9.    सोलर वाटर प्यूरीफायर बनाना है ( 1 ltr per day, experimental)
10.           नहाने के साबुन में 70% कमी.
11.           40% कच्चा खाना, 50% उबला खाना 10% प्रोसेस्ड खाना ( present status 5-80-15)
12.           किचिन गार्डन.
13.           प्यूरीफायर वाटर ड्रेन किचिन गार्डन में
14.           कागजी पैपर और मेगजीन की जगह ई-पैपर और मेगजीन
15.           कागज में 50% कटौती.
16.           किचिन कम्पोस्टींग
17.           Install water level alarm in roof top tank
चलो अब कुछ काम भी किया जाये....जय पर्यावरण...जय हो उसे उसे मनाने वालों की.   

Wednesday, March 15, 2017

खंण्ड- 16 पुनर्जन्म केसे


सफर (खंण्ड-1/16 एक्सीडेंट)
सफर (खंण्ड-2/16 देवदूत)
सफर ( खंण्ड-3 उलझन)
सफर (खंण्ड-4 स्वर्ग-नरक)
सफर (खंण्ड-5 नया आयाम)
सफर (खंण्ड-6 समझ)
सफर (खंण्ड-7 धरर्ती पर वापसी)
सफर (खंण्ड-8 हे इश्वर अभी क्यों नही)
सफर (खंण्ड-9 कल्पना की उडान)
सफर (खंण्ड-10 संगीत)
सफर (खंड-11 इश्वर से मिलने की जिद्द)
सफर (खंड -12 नर्क का अहसाहस)
सफर (खंण्ड- 13 दर्द क्यों)
सफर (खंण्ड- 14 जीवात्मा)
सफर (खंण्ड- 15 पुनर्जन्म)
सफर (खंण्ड- 16 पुनर्जन्म केसे)

खंण्ड- 16  पुनर्जन्म केसे

मै पृथ्वी पर मन चाहा शरीर केसे प्राप्त करूगा , मुझे केसे पता चलेगा की जिस घर मे पैदा होना चाहता हू वो अमीर है गरीब. वो किस धर्म का है. जिस शरीर को मे धारण करूगा वो नर है या मादा..किशन एसे बहुत से सवाल है जिस का जबाब मे जानना चाहता हू.
किशोर कोइ पुनर्जन्म क्यों लेना चाहेगा,
आप बताइये !
इसकी बहुत सारी वजह हो सकती है जेसे,
अधूरी वासनाओं को पूरा करना चाहता है
चोरी, हत्या, ठगी, धोखा इनके बारे मे सीख अधूरी हो
 नये अनुभव के लिये  
इश्वरीय संदेश देने के लिये
यदि किसी व्यक्ति को धोखे से, कपट से या अन्य किसी प्रकार की यातना देकर मार दिया जाता है तो बदले की भावना से वशीभूत होकर उसकी चेतना पुनर्जन्म अवश्य लेना चाहेगी। छल कपट का यह खेल चलता रहता है जब तक की उसकी जीवात्मा यह नही समझ जाती की उसका विकास उन सब को माफ करने मे है और इस सब को भूलाकर आगे बढने मे है.
पारिवारिक रिश्तों की समस्या भी पुनर्जन्म का एक बढा कारण होती है. इसी तरह अगर इसी दोस्त ने धोखा दिय तो वो इस बार उसी धोखा देने का सबक देगा. इस तरह उसकी योनी , समाज, धर्म तय हो जाते है.
मजेदार बात यह है की नया जन्म लेने के बाद पिछले जन्म कि याद बहुत ही कम लोगो को रह पाती है। वो भी कुछ लोगो बचपन मे ही उसे याद कर पाते है और जेसे जेसे उअमर बढती है वो उसे भूल जाते है. बस एक भावना रह जाती है. और जब भी उससे मिलती जुलता घटना होती है हम बैचेन हो जाते है.
किशन, एक तरह से अच्छा ही होता है वरना पिछले जन्म की यादों के साथ दूसरा जन्म जीना बहुत लोगों के लिये किसी नर्क के समान ही होता.
अब तुम्हारा भी समय हो गया है की तुम धरती पर दुबारा जन्म लो
मुझे तो मलुम ही नही की इस बार मुझे क्या करना है,
तुम्हे मालुम करने की जरूरत भी नही. तुम्हे तो बस हर पल निर्णय लेना है और कर्म करना है. वो सब तुम्हारे पिछले अनुभव का ही नतीजा होंगे. मेने कहा ना शिक्षक भी तुम हो और शिष्य भी तुम हो.    वेसे किशोरतुम्हारी अंतरआत्मा को मालुम है , अगर गंभीरता से उस पर मनन करोगे तो समझ जाओगे. 
 दूसरा जन्म इतनी जल्दी, अभी तो मुझे आपसे बहुत कुछ सीखना और समझना है ?
मेन कहा ना यंहा समय अलग तरीके से काम करता है. मुझे जो समझना था वो समझा चुका हू. क्या तुम्हे इस बात का जरा भी अंदाज है की तुम्हारी धरती पर मृत्यु को कितना समय हो गया है
यही कोइ कुछ वर्ष  ...
पूरी एक शताबदी गुजर चुकी है
विश्वास नही होता
यानी अगर मे अभी जन्म लू तो वंहा 2116 चल रहा होगा
सही कहा
वंहा तो सब बदल चुका होगा मै उत्सुक हू यह जानने के लिये इन 100 सालों मे हम इंसानों ने क्या उन्नति की है
तुम तो इश्वर से मिलने को उत्सुक थे ...किशन ने हंसते हुये कहा
आपने सही कहा किशन अभी मेरा इश्वर से मिलने का समय नही हुआ है. वेसे भी यह दरवाजा तो मेरा ही बनाया हुआ है. उनकी प्रेरणा तो मेरे साथ हर समय है.
तो फिर देर किस बात की किशोर, आगे बढो और सामने दिख रहे दरवाजे को खोलो, वंहा तुम्हे इश्वर के बारे मे फेली बहुत सी भ्रांतियों को दूर करना है.तुम्हे वंहा बहुत बढे काम करने है. यंहा जो कुछ भी सीखा है देखते है उसे केसे तुम अपने नये जीवन मे उपयोग करते हुये अपना और लोगों का जीवन बेहतर बनाते हो.
पर उसके दूसरी तरफ तो इश्वर है , मेरे चेहरे की उलझन देखकर किशन मुस्करा दिया
हां भई हां वंहा इश्वर आपका अपनी पूरी श्रृष्टी के साथ इंतिजार कर रहा है.
इस बार किशन के  चेहरे की गूढ मुस्कान है ... जेसे वो ओर कोइ नही मेरे कृष्ण हो , अचानक उनकी बांसुरी की धुन मेरी सारी चेतना पर छाने लगी ... मेरा इश्वर मेरे सामने था...दरवाजा खोलते ही एक तेज प्रकाश से मेरा सामना हुआ .... मेरी चेतना उसमे वीलीन होती चली गई.