Monday, October 1, 2012

मंथन ...एफ़डीआई


 बुराइ ताकतवर है क्योंकी वो अकसर एकजुट होती है. और अच्छाइ कमजोर क्योंकी वो अकसर बिखरी हुई होती है . वेसे भी जो खुद आसानी से बिखर जाता हो वो केसे लोगो को एकजुट कर पायेगा . हमारी इसी कमजोरी ने FDI के लिये रास्ता साफ किया . FDI के विरोधी उसके चंद समर्थकों से कही ज्यादा थे...पर वो हार गये. 51% हिस्सेदारी का लोग मतलब ही नही समझ पाये
भारत मे व्हाइट और ब्लेक अर्थ व्यवस्था है। मेरे हिसाब से व्हाइट अर्थ व्यवस्था वो जिससे सरकारो को  टेक्स मिलता हो और ब्लेक वो जिससे सरकारो कोई टेक्स ना मिले । FDI के कारण ब्लेक अर्थ व्यवस्था खतरे मे है। सरकार खुश है की एफ़डीआई से उन्हे टेक्स ज्यादा मिलेगा। पर वो भूल जाते है की ब्लेक अर्थ व्यवस्था गाँव ,  देहात  और कस्बो की व्यवस्था है। किसान मजदूर गरीब देहाड़ी की व्यवस्था है । FDI की मार इन पर पड़ेगी। छोटे दुकानदार ऑनलाइन सामान विक्रेता के सामने नही टिक पायेगे। 
अब इस देश मे असली कटपुतली सरकारों के दर्शन होंगे. आगे स्थति और भंयकर होने वाली है. आगे आने वाला समय अब गुलाम सरकारों का है. यह देश 65 सालों से गरीबी मिटाओ का नारा देता रहा....अब नारा होगा गरीब मिटाओ...ओह क्या इसके लिये उन्हे किसी नारे की भी जरूरत होगी
सरकार  अपनी कमाई  के हर 100 मे से 28 रूपये व्याज के देती है। अब नंगा पहनेगा  क्या और नहा कर निचोड़े क्या 
...FDI का दुनिया भर मे यही कुचक्र है.

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