Wednesday, May 25, 2011

सुपर केपेसिटर





परंपरागत तेज और शक्तिशाली पर उर्जा भंडरण में कमजोर केपेसीटर अब अपनी काया पलट कर सुपर अल्टरा केपेसीटर बनकर उर्जा भंडारण की अपनी क्षमता को दोनों-दिन बढाते जा  रहे है. यह जल्द ही कारों और इलेक्ट्रानिक उपकरणों में लगने वाली लेड एसिड या लिथियम आयन बैटरी की जगह ले रहे है. हाइब्रिड कारों के लिये यह आदर्श  साबित हो रहे है क्योंकी हाइबिर्ड कारों में बैटरी के साथ प्रयोग करने से ब्रेक और ऐक्सेलरैशन के समय बर्स्ट पावर की जरूरत को ये आसानी से पूरा कर सकते है. जनरेटिव ब्रेकिंग में यह आसानी से उर्जा को सोख लेते है और ऐक्सेलरैशन के समय यह आसानी से ड्राइव मोटर को उर्जा देते है. इसके साथ ही इनकी  जीवनकाल किसी भी कार की जिदंगी से लम्बा होता है 


जरा सोचिए, किसी बैटरी को चार्ज करने में घंटों की जगह कुछ सेकंड्स लगें तो जिंदगी कितनी आसान हो सकती है। वैज्ञानिकों ने इस सोच को हकीकत में बदल दिया है। परंपरागत बैटरी को चार्ज करने में घंटों का वक्त लगता है। ऐसे में आप रात भर बैटरी चार्ज करना भूल जाते हैं तो गड़बड़ होती है। अब उन्होंने परंपरागत तरीके के मुकाबले सौ गुना तेजी से बैटरी चार्ज करने का तरीका ढूंढ निकाला है। इस तकनीक से मोबाइल फोन, लैपटॉप, आईपॉड, डिजिटल कैमरा और दूसरे गैजिट्स का इस्तेमाल तो बेहद आसान होगा ही, इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों के इस्तेमाल में क्रांति आ जाएगी। मोबाइल फोन की बैटरी को तो महज 10 सेकंड में चार्ज करना मुमकिन होगा। अब इलेक्ट्रिक कार की बैटरी को चार्ज करने में चंद मिनटों का वक्त लगेगा, आज कल इतना समय तो किसी कार में पेट्रोल भरवाने में लगता है। यह सब सुपर या अल्ट्रा केपेसिटर  के आविष्कार से सभंव हो गया है.

अल्टरा केपेसिटर दिखने में एक साधारण केपेसिटर जेसा ही है जो सब एटामिक गुण का इस्तेमाल कर इलेक्ट्रोन का भंडारण करता है. वहीं बैटरी रासायनिक प्रकिर्या का इस्तेमाल करती है. अल्टरा केपेसिटर सेल 2 से 3 वोल्ट के होते है पर इन्हे बैटरी की तरह सीरीज में लगाकर इनका वोल्ट बढाया जा सकता है. इसके कारण सुपर केपेसिटर में एसी खुबियां है जो सधारणत: बैटरी में नहीं होती है

1.       यह उर्जा के भंडारण  रासायनिक की जगह इलेक्ट्रोस्टेटिक रूप में करते है इसलिये इन्हे सिध्दांत: कितनी ही बार चर्ज और डिस्चार्ज किया जा सकता है.

2.       इनकी उर्जा भडारण और विसर्जन दक्षता बहुत अच्छी होती है. यह तुरंत चार्ज और डिस्चार्ज किये  जा सकते है. जितने भी अल्टरा केपेसिटर है वो सब अपनी पूरी उर्जा 2 सेकंड से कम समय में चार्ज और डिस्चार्ज कर सकते है

3.       इनमे आंतरिक अवरोध ना के बराबर होता है इसके कारण यह उर्जा को ना के बराबर बरबाद  करते है. और इनकी दक्षता 97 से 98% तक होती है

4.       यह बैटरी की तरह लीक नहीं करते या खराब नहीं होते क्योंकी चार्ज और डिस्चार्ज के समय इनमे कोई रासायनिक बदलाव नहीं होता

5.       बैटरी 2 से 3 वर्षों ही चलती है वही इन सुपर चार्ज केपेसिटर बैटरी का जीवन काल बहुत ज्यादा है. 





1745 में पहला इलेक्ट्रोस्टेटिक केपेसिटर लेडन जार के नाम से जाना गया जो इलेक्ट्रोस्टेटिक उर्जा को जमा कर सकता था. उसका सिद्धांत आसान था कि दो मेटल प्लेट के बीच इंसुलेटर लगाने के बाद जब इन प्लेटों को विद्युत सर्किट से जोडा जाता है तो उन पर इलेक्ट्रीकल चार्ज के रूप में उर्जा जमा हो जाती है. इस उर्जा को बाद में इस्तेमाल किया जा सकता था. उसके बाद रासायनिक बैटरी का उर्जा भंडारण के लिये इस्तेमाल होने लगा क्योंकी  रासायनिक बैटरी की तुलना में केपेसिटर की उर्जा भंडारण क्षमता नगण्य थी. 200 वर्षों से ज्यादा समय तक रासायनिक बैटरी विद्युत उर्जा संग्रह का काम करती रही.

देखा जाये तो केपेसिटर की विद्युत उर्जा संग्रह करने की क्षमता तीन मुख्य कारणों से निर्धारित होती है. 1. मेटल इलेक्ट्रोडप्लेट का क्षेत्रफल 2. इलेक्ट्रोड प्लेट के बीच की दूरी और 3. उसके बीच लगे इंसूलेटिंग पदार्थ का डाईइलेक्ट्रिक का मान. इसकी विकास  प्रक्रिया में  मेटल प्लेट कि मोटाइ, इनके बीच की दूरी और इनमें लगने वाला इंसूलेटर के डाईइलेक्ट्रिक मान में लगातार सुधार होता गया इलेक्ट्रोड प्लेट और डाईइलेक्ट्रि पदार्थ पतले से पतले होते गये और इनकी उर्जा संग्रहण क्षमता में लगातार सुधार होता रहा.   ‘

1930 में जब इलेक्ट्रोलाईट आधारित केपेसिटर का अविष्काकार हुआ तो इनकी उर्जा भंडारण क्षमता मे अभूतपूर्व वृध्दी हुई. इलेक्ट्रोलाईट केपेसिटर दिखने में इलेक्ट्रोस्टेटिक केपेसिटर जेसे ही होते है. इलेक्ट्रोस्टेटिक केपेसिटर में मेटल प्लेट के बीच माइका ,ग्लास या पेपर लगाया जाता है जिसे 0.3 mm  से अधिक पतला नहीं बनाया जा सका. वही  इलेक्ट्रोलाईट केपेसिटर ने इसा सीमा को तोडा क्योंकी इसमे एल्यूमिनियम फिल्म पर ही एल्यूमिना (Al2O3) की लेयर बनाइ गई. जो मात्र कुछ माइक्रोन की होती है. इससे केपेसिटर क्षमता को कई गुना बढा दिया पर फिर भी रासायनिक बैटरी की तुलना में इनकी संग्रहण क्षमता अभी भी बहुत कम थी.  पर हाल ही के वर्षों में नेनोटकनोलोजी को इस्तेमाल कर अल्ट्रा केपेसिटर का विकास किया गया जिसने इनकी  उर्जा भंडारण  क्षमता को हजार गुना बढा दिया.

आपने गरजते बादलों को देखा होगा यह पृकति के महा सुपर केपेसिटर है. इनकी शक्ति ने आपको भी अचंभित किया होगा इसमे बादल बहुत बढी प्लेटों का रोल निभाते है जिसकी बदौलत इनमे इअनी सारी उर्जा इकठ्ठीहो जाती है. अब केपेसिटर की उर्जा भंडारण क्षमता या तो बेहतर डाइइलेक्ट्रिक पदार्थ अपनाकर या फिर प्लेट का क्षेत्रफल बढाकर या फिर इनके बीच की दूरी को कम करके बढाई जा सकती थी. इनके विकासक्रम को भी इनकी चार्ज प्लेट की बीच की दूरी से समझा जा सकता है. पहले चार्ज प्लेट के बीच दूरी मिलीमीटर में होती जो इलेक्ट्रोलाईट केपेसिटर के कारण घटकर माइअक्रोन मे आ गई और अब सुपर केपेसिटर में यह नेनोमीटर में है,

सुपर केपेसिटर में भी सधारण केपेसिटर की तरह दो प्लेट के बीच डाइइलेक्ट्रिक पदार्थ होता है. पर प्लेट पोरस पदार्थ जेसे अक्टीवेटड  चार्कोल से बनी होती है. इसको समझने के लिये  हम विद्युत को पानी मान ले तो सधारण केपेसीटर पानी से भीगा एक कपडा है वही सुपर केपेसिटर पानी से भीगा स्पंज जो कपडे की तुलना में असाधरण रूप से ज्यादा पानी सोख सकता है. एक समय था जब 1 फेराड केपेसीटर का साइज एक कमरे से भी बढा होता था और उसे बनाने में लाखों रूपये खर्च होते थे पर आज नेट सर्च करने पर 4000 फेराड का केपेसीटर जो सोडा केन से भी छोटा है 250 डालर से भी कम में मिल सकता है.   इसके कारण अब आसानी से यह 4000 फेराड तक के बनाये जा रहे जो  कभी नेनो, पिको, माइक्रो, या मिली फेराड में होते थे.





पहला सुपर केपेसिटर 1950 में बनाया गया उसके बाद इसमे लगातार सुधार होता रहा नेनो टकनीक ने इसकी क्षमता को कई सौ गुना बढा दिया उर्जा घनत्व के मामले में अभी भी यह यह पंरपरागत बैटरी का मुकाबला नही कर सकते पर इनमें  खतरनाक रसायन नहीं होते और यह जल्दी खराब नही होते. इन्हे लाखों बार चार्ज और डिस्चार्ज किया जा सकता है.






अल्टरा केपेसीटर मैसाचूसिट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (एमआईटी) के वैज्ञानिकों के दिमाग की उपज है। एमआईटी की इस टीम का कहना है कि यह बैटरी और केपेसिटर का मिला जुला रूप है. और इन्हे कितनी ही बार चार्ज किया जा सकता है. इनमे ओवर चार्जिंग का भी कोई खतरा नहीं है. बहुत ही कम विद्युत अवरोध  के कारण इनका चार्ज और डिस्चार्ज रेट बहुत ज्यादा हो सकता है इनकी cycle efficiency 95% तक हो सकती है. MIT  के वैज्ञानिकों ने जो विधि विकिसित की है उससे कार्बन नेनो ट्यूब अपने आप को वर्टीकली अलाइंड कर लेती है इससे सस्ता, दक्ष और दीर्ध जीवन काल वाला अल्ट्रा केपेसीटर बनाने में मदद मिलती है. इस विधि पर आधारित वो अब ऐसा सुपर अल्ट्रा केपेसिटर बना रहे है, जिसकी उर्जा भंडारन क्षमता 3000 WH /KG होगी. लेड एसिड बैटरी  की उर्जा भंडारन क्षमता 30 to 40 wh/kg  और आधुनिक लिथियम आयन बैटरी की 160 wh/kg होती है . पेट्रोल की करीब 12,000 wh/kg, जो 15%  कार्य क्षमता के साथ (टेंक से व्हील तक) उसका फायदा 1800 wh/kg ही मिलता है. अगर इसमे यह सफला होते है तो हम पेट्रोल और डिजल पर वाहनों की निर्भरता को काफी हद तक खत्म कर सकेगें.


टेक्सास की एक कंपनी का भी दावा है की उसने बेरियम टाइटेनेट (BaTiO3) पर आधारित सुपर बैटरी का निर्माण कर लिया है जिसकी पावर घनत्व 26 वाट/इंच3 से भी ज्यादा है जो साधारण लेड एसिड बैटरी का कम से कम दस गुना है. अगर यह सच है तो यह एक क्रांतकारी आविष्कार साबित होगा. ओटोमेटड असेमब्ली तकनीक और इनकी बढती मांग के कारण इनकी कीमत  दिनों दिन कम होती जा रही है. वो दिन दूर नहीं जब इनकी कीमत पंरपरागत बैटरी से कम होगी.

पर्यावरण अनुकूल विद्युत कारों और ट्रामों के इस्तेमाल में अभी तक सबसे बड़ी अड़चन बैटरी चार्ज होने में लगने वाला वक्त ही रहा है। अगर चंद मिनटों में बैटरी चार्ज हो जाये तो ट्रामों को चलाने के लिये ओवरहेड तारों की जरूरत नहीं होगी क्योंकी यह हर स्टाप पर अपने को तुरंत चार्ज कर पायेंगी. इलेक्ट्रिक कारें एक बार चार्ज करने के बाद मात्र 50 से 60 किलोमीटर तक का सफर तय कर पाती है. उसके बाद इन्हे कम से कम 8 घंटे तक चार्ज करना होता है. इन्हे चार्ज करने के लिये लगने वाला समय बैटरी से चलने वाली कारों और ट्रामों के उपयोग को सिमित कर देता है अब अगर बैटरी भी वाहन में पेट्रोल भरने में लगने वाले जितने समय में चार्ज हो जाये तो यह एक क्रांतकारी बदलाव ला सकता है.  शहरों में अधिकतर हम एक बार में  15 से 20 किलोमिटर ही वाहन चलाते है उसके बाद वो पार्क किये जाते है. सभी पार्किंग जगहों पर अगर चार्जिंग सुविधा देने लगें तो बैटरी के वज़न में भारी कमी ला सकते है. इलेक्ट्रिक  कार और स्कूटर की अधिकतम गति 40 से 50 kmph होती है जो इन बैटरी के आते ही यह पेट्रोल इंजन की तरह तेज रफ्तार हो पायेंगी




यह सच है की अभी भी पंरपरागत बैटरी उर्जा भंडारणके मामले में आज भी अल्टरा केपेसिटर से बेहतर है पर शक्ति के मामले में अल्टरा केपेसिटर का मुकाबला नही कर सकती. भविष्य में इनके मिले-जुले इस्तेमाल में हमारी कई उर्जा समस्याओं का समाधान छुपा है.

Sunday, May 22, 2011

डा.सुनीलम का जीवन परिचय

म0प्र0 के किसान, मजदूर आदिवासियों को उनका हक, न्याय और सम्मान दिलाने के लिये संघर्षरत पूर्व विधायक डॉ0 सुनीलम् का जन्म भोपाल के सुल्तानिया अस्पताल भोपाल में 27 जुलाई, 1961 को हुआ। इनके पिता मूलतः रायसेन जिले की बेगमगंज तहसील के ग्राम मड्खेड़ा टप्पा के निवासी हैं तथा मॉं सागर की निवासी थी। आपके माता पिता दोनों ही प्राचार्य के पद से सेवा निवृत्त होने के बाद ग्वालियर में बस गये।

मॉ का ग्वालियर में ही देहान्त हो गया। डॉ0 सुनीलम् के छोटे भाई आदर्श मिश्रा पिता जी के साथ ग्वालियर में रह रहे हैं तथा बहन और जीजाजी ग्वालियर में डॉक्टर है। डॉ0 सुनीलम् की पत्नी श्रीमती वंदना मिश्रा विकलांग जन संस्थान दिल्ली में विषेषज्ञ के तौर पर कार्यरत है। यह आसरा नामक विकलांगो के लिये निःषुल्क कम्प्यूटर शिक्षा देने वाली संस्था का संचालन कर रही हैं। उनका 17 वर्षीय बेटा शाष्वत दिल्ली में ही पढ़ रहा है। प्राथमिक षिक्षा से लेकर एम.एस.सी. (एप्लाईड इलेक्ट्रॉनिक्स) तक ग्वालियर से करने के बाद उन्होंने पी.एच.डी. डिग्री बायो मेडिकल इलेक्ट्रानिक्स में दिल्ली विष्वविद्यालय से प्राप्त की। आस्टेªलिया मेलबोर्न में शोध कार्य छोडकर सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हुए। डॉ0 सुनील मिश्रा की जगह डॉ0 सुनीलम् लिखने की प्रेरणा डॉ0 लोहिया के जाति तोड़ो आंदोलन से प्राप्त हुई। इसी कारण उन्होंने जाति सूचक नाम लिखना बंद कर दिया। राजनीति में आपका प्रवेष इमरजेंसी का विरोध करनेवाले एक स्कूली छात्र के रूप में सन् 1976 में ग्वालियर में हुआ।

बैतूल आपका कार्यक्षेत्र 19 वर्ष पूर्व बना जब आपको आदिवासियों के बीच साक्षरता विषय पर लिखन क लिये एक राष्ट्रीय दैनिक संपादक द्वारा दिल्ली से बैतल भेजा गया। आप घोड़ाडोंगरी क्षेत्र क ग्राम बंजारीढ़ाल, जहां आदिवासियों का गदर अंग्रेजों के खिलाफ हुआ था, पहुंचे। इस इलाके का अध्ययन करने के दौरान क्षेत्र के आदिवासियों के आग्रह पर उन्होंने किसानों पर लगाये गये चराई टैक्स के खिलाफ पहली बार आवाज बुलन्द की। तत्पष्चात सन् 1985 में बैतूल जिले में सूखा पड़ने पर शाहपुर से बैतूल के बीच 10,000 किसान आदिवासियों का सूखा मार्च आयोजित किया। चोपना प्रोजेक्ट के अधिकारियों द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ बंगालियों के आग्रह पर जब वे चोपना पहुंचे तब उन पर जान लेवा हमला किया। हमला उनके ऊपर हुआ और उन्हें ही गिरफ्तार किया गया। डॉ0 सुनीलम् पर 5 बार जानलेवा हमला हो चुके है वे सैकड़ों बार वह जेल जा चुके है। आज तक उन पर 132 मुकदमे दर्ज किए गए है।

जेल में आपकी मुलाकात पाथाखेड़ा के नागरिक संघर्ष समिति के नेताओं से हुई, वे पाथाखेड़ा में पानी, बिजली के सवाल को लेकर सषक्त आंदोीलन चला भी रहे थे। इन आंदोलनों के दौरान डॉ0 सुनीलम् को कई बार अनावष्यक तौर पर गिरफ्तार किया गया। यहां तक कि उनका कार्यालय भी ढहा दिया गया। इस बीच पंखा में वीयरवेल टायर फैक्ट्री के श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी दिलाने के सवाल पर उन्होंने यूनियन गठित कर आन्दोलन शुरू किया, वहां भी फैक्ट्री मालिक के गुंडो द्वार उन पर जानलेवा हमला करवाया गया। 9 दिन के आमरण अनषन के बाद मजदूरों का मालिक के साथ समझौता हुआ।

सन् 1990 में आपने मुलताई से चुनाव लड़ा तथा पीने के पानी की समस्या को लेकर आंदोलन की शुरूआत की। इस बीच आपका प्रयास जिले में रचनात्मक कार्याे को चलाने का भी रहा। आपके पास जो जमीन ग्राम उड़दन, ग्राम पंचायत जामठी में थी वह आपने डॉ0 लोहिया आदिवासी समता केन्द्र को सौंप दी। केन्द्र के प्रबंधन्यासी के तौर पर आप बैतूल में पीने पानी की समसया के लिये रचनात्मक कार्य करते रहे। इनका लाभ कई ग्रामों के किसान उठा रहे है तथा महिलाओं के बुनाई प्रषिक्षण केन्द्र के माध्यम से महिलाओं को रोजगार भी प्राप्त हो रहा है।

विष्वविद्यालयीन षिक्षा पाते हुए आपने दिल्ली में प्रतिपक्ष नामक साप्ताहिक तथा बाद में मासिक पत्रिका का संपादक किया जिसके मुख्य संपादक श्री जार्ज फर्नाडीस थे। तत्पष्चात आपने न्याय चक्र नामक पत्रिका का संपादन किया जिसके मुख्य संपादक श्री रामविलास पासवान है। इस बीच आपने समाजवादी आंदोलन पर दी किताबें प्रो. विनोद प्रसादसिंह के साथ और एक किताब श्री सुरेन्द्र मोहन जी के साथ संपादित की। इसके अलावा आप समसामायिक मुद्दों पर लिखते रहे हैं। आप देषभर में चल रहे जन आंदोलनों से संबंध रखने वाले सक्रिय कार्यकर्ता है।

भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के संस्थान कर्पाट के लिये आपने 250 से अधिक स्वयंसेवी संस्थाओं का मूल्यांकन भी किया। सन् 1989 की राष्ट्रीय मोर्चा सरकार के दौरान बनाई गई राष्ट्रीय युवा नीति को तैयार करने में आपने मुख्य भूमिका निभाई।

सन् 1989 से 1997 तक आप युवा जनता दल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे। पूर्व प्रधानमंत्री श्री वी.पी. सिंह के संचालन के चलाये गये युवा शक्ति अभियान का आपने नेतृत्व किया। इसके साथ साथ इंटरनेषनल यूनियन ऑफ सोषलिस्ट यूथ 120 देषों के युवा समाजवादियों के संगठन का आपको दो वर्षो के लिये सन् 1995 में उपाध्यक्ष चुना गया।

12 जनवरी 1998 की मुलताई किसान संघर्ष समिति के आंदोलनकारियों पर पुलिस, द्वारा बर्बरतापूर्ण तरीके से किये गये गोली चालन में 24 किसान शहीद हुए। डॉ0 सुनीलम् सहित 250 से अधिक किसानों पर 67 मुकदमें दर्ज कर आपको जेल भेज दिया गया। तीन महीने जेल में रखने के बाद हाई कोर्ट के आदेष पर जमानत पर रिहा किया गया। मुलताई के किसानो ने भीषण विपरीत परिस्थिति तथा पुलिस दमन के बावजूद संघर्ष समिति का साथ नहीं छोड़ा। चिखलीकला महापंचायत में ग्रामीणों ने विभिन्न पंचायतों से प्रस्ताव लाकर उन्हें लोक उम्मीदवार बनाया। सरकार,पुलिस, प्रषासन,सभी राजनैतिक दलों तथा जातीय संगठनों की पूरी ताकत लगाने के बावजूद उनहें मतदाताओं ने 50 प्रतिषत से अधिक मत देकर विजयी बनाया।

अन्तर्राष्ट्रीय गतिविधियों के दौरान आपको 60 से अधिक देषों में वहं के वरिष्ठ नेताओं, षिक्षाविदों, पत्रकारों तथा युवा नेताओं और कई देषांे के प्रधानमंत्रियों एवं मंत्रियों के साथ चर्चा तथा बहस करने के अवसर प्राप्त हुआ। जिसके दौरान आपने भारत के राष्ट्रीय हितों को लेकर अपना दृष्टिकोण मजबूती से पेष किया। जुलाई 2000 में उन्हें यूसी द्वारा स्वीडन में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय युवा महोत्सव को संबोधिंत करने के लिये बुलाया गया जिसमें उन्होंने स्वीडन के प्रधानमंत्री और दक्षिण अफ्रीका तथा चिली के राष्ट्रपति के साथ विष्व व्यापार संगठन के मुख्य महासचिव माईक मूर के साथ खुली बहस में हिस्सा लिया। एषियाई देषों के युवाओं को संबोधिंत करने के लिये आप 1999 में मलेषिया बुलाये गये।

राष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्रता, लोकतंत्र व मानवाधिकारो के सवाल के लिए गठित भारतय एकजुटता समिति के राष्ट्रीय सचिव भी है जिसका मुख्यालय कोची (केरल) में स्थित है।। उन्होंने कुष्ठरोगियों के बीच कार्य करने वाली कुष्ठ कल्याण समिति के संचालक के तौर पर कार्य किया तथा कपार्ट के पष्चिम क्षेत्र को संचालन समिति के उन्हें अन्ना हजारे के संयोजकत्व में सदस्य के तौर पर कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ।

डॉ0सुनीलम् निर्माण मजदूर पंचायत संगम, ग्वालियर के मॉडल फाउण्डेषन स्कूल, बेगमगंज रायसने के न्यू मॉडल हाई स्कूल तथा मुलताई के ताप्ती महाविद्यालय आदि शैक्षणिक संस्थाओं से जुडे रहे है।

डॉ0 लोहिया समता आदिवासी केन्द्र के प्रबन्ध न्यासी है। हिन्द मजदूर किसान पंचायत के राष्ट्रीय अतिरिक्त महामंत्री रहे है। जिसका हिन्द मजदूर सभा के साथ विलय हो गया है। मजदूर सभा, निर्माण मजदूर पंचायत संगम, सोषलिस्ट फ्रन्ट के साथ जुड़कर कार्य करते है। राष्ट्र सेवा दल के प्रदेष कार्यकारी अध्यक्ष है।

बैतूल जिले में अब तक 176 महापंचायतें आयोजित की जा चुकी है। शहीद किसानों की स्मृति में हर वर्ष 34 शालाओं में प्रथम आने वाली छात्राओ को पारितोषिक देने का कार्य भी डॉ0 सुनीलम् की मॉ स्व विद्यावती मिश्र की स्मृति में बने ट्रस्ट विद्या मेमोरियल डॉफ्ट 12 जनवरी के हर वर्ष किया जा रहा है।

डॉ0 सुनीलम् ने 25 जुलाई। 2003 से एक सप्ताह के लिए इंजिपट का दौरा किया। इंजिप्ट में हुए इंटरनेषल प्रेसीडेन्ट सोषलिस्ट ग्रुप के युवा समाजवादियों के अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल हुए जहां उन्होंने इजिप्ट के प्रधानमंत्री सोषलिस्ट इंटरनेषनल प्रेसीडेन्ट एवं स्पेन के पूर्व प्रधानमंत्री के साथ 120 देषोंके 10 हजार युवाओं को संबोधित किया। डॉ0 सुनीलम् विष्व व्यापार संगठन विरोधी भारतीय जन विरोधी अभियान से जुड़े रहे है।

डॉ0 सुनीलम् ने प्रदेष में सर्वाधिक प्रष्न पूछने वाले विधायक के तौर पर रिकार्ड बनाया है। डॉ0 सुनीलम् को विधानसभा से कांग्रेस, भाजपा ने षडयंत्रपूर्वक निलंबित कराने का कार्य किया। 23 मार्च, 2002 को भोपाल में म0प्र0 किसान मजदूर आदिवासी क्रांतिदल का गठन किया। एक वर्ष के भीतर 30 जिलों में इकाईयों का गठन किया। 3 अगस्त को प्रदेष कार्यकारिणी ने समाजवादी पार्टी के नेता श्री मुलायमसिंह यादव से बातचीत के लिये डॉ0 सुनीलम् को अधिकृत किया। 3 अक्टूबर को प्रदेष कार्यकारिणी ने क्रांतिदल का समाजवादी पार्टी में विलय का प्रस्ताव लिया। 15 अक्टूबर को भोपाल के विषेष अधिवेषन में विलय का निर्णय लिया। प्रदेष में म0प्र0 किसान संघर्ष समिति की किसान महापंचायते 30 विधानसभा क्षेत्रों में आयोति की जा रही है ं

नवम्बर 2003 के विधानसभा चुनाव में आप समाजवादी पार्टी के विधायक की हैसियत से 19685 मतों से चुनाव जीत कर विधानसभा में दुबारा पहुंचे। वर्तमान में डॉ0 सुनीलम् म0प्र0 किसान संघर्ष समिति के संस्थापक प्रदेषाध्यक्ष तथा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव है।

डॉ0 सुनीलम् जन आंदोलनो का राष्ट्रीय समन्वय इंसाफ, किसान संगठनो का राष्ट्रीय समन्वय, भारत बांग्लादेष, पाकिस्तान पीपुल्स फोरम, साउथ एषीयन फ्रेटरनिटी, जीएम फ्री इंडिया अभियान से जुडे हुए डॉ0 सुनीलम् ने 9 अगस्त से 12 अक्टूबर 2009 के बीच 21 राज्यो की तथा 29 मार्च से 9 अपै्रल 2010 के बीच पूर्वात्तर राज्यो की यात्रा की। डॉ0 सुनीलम् पूर्व में म0प्र0 की 3 बार 15 हजार कि0मी0 की तथा 1 बार मामा बालेष्वर दयाल की स्मृति में उनके जन्मभूमि निवाडी कला इटावा से कर्म भूमि बामनिया तक यात्रा कर चुके।

डा. सुनीलम के लेख और समाचारों का संकलन



जीवन परिचय

सप्तक्रांती यात्रा - Remembering Dr Lohia 

 डा. सुनीलम के लेख और समाचार  संकलन

समाचार 
दिनांक
लिंक
28-May-11SP National Secretary Attacked in MP

28-May-11
PUDR strongly condemns vicious attack by Adani goons on those protesting
against the power project

23-May-11
22-Apr-11
अद्भूत चुनाव


29-Dec-10
आज भी बिजली नहीं है इन 92 गावों में
27-Oct-10स्वच्छ राजनीति और जेपी की विरासत

1-Oct-10
कश्मीरियों का विश्वास जीतने के लिये कुछ तो करे सरकार

27-Sep-10
Saptakranti Vichaar Yatra enters Punjab
21-Sep-10Kashmir needs political solution’ 

30-Aug-10
Lohia and Saptkranti

14-Jun-10
सड़क को लेकर शुरू की पदयात्रा

23-Aug-09
Yatra to create awareness of social disparities comes to Tiruchi 

9-Mar-06
एमपी विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष में मारपीट

28-Jun-05
राष्ट्र रक्षकों ने जलाया पुलिस का पुतला
किसानों की रैली 
गुंडा सूची में शामिल करना मतदाताओं का अपमान : डॉ सुनीलम्
लेख 
क्या भूषण परिवार पर उंगली उठाने...

1-Jul-06
सुनीलम् ने लिखा सीएम को पत्र
भविष्य का समाजवाद
युवाओं को वैचारिक व बौद्धिक गुलामी से बाहर लाना सबसे बड़ी चुनौती - डॉ. सुनीलम्
देश में नई ऊर्जा का संचार करने वाले आस्था पुरूष फकीर अन्ना हजारे...

sapt kranti yatra- Remembering Dr Lohia



sapt kranti yatri pictures....


23 March 2009 is a important date for Socialists in India as it is the beginning of birth centenary celebrations of Dr Ram Manohar Lohia, a socialist Ideologue, visionary, principled politician who propogated ideas of seven revolutions and non-congressism. Dr Lohia gave concept of seven revolutions (Sapt Kranti). He said that seven injustices are committed continuously and simultaneously, which included conflict between rich and poor, inequality within and between the nations, discrimination between men and women, discrimination on the basis of colour, conflict between upper caste and the lower caste, movement against nuclear bomb and other violent methods through non-violent means i.e. satyagrah and civil disobediance.
To propogate sapt kranti idea Saptakranti Vichar yatra was organized by Rastriya Seva Dal and Yusuf Meher ali yuva Biradari from 9 agust 2009 to 12 oct 2009 on Dr Ram manohar Lohia Birth centenary year by road through 21 states and completed 20,000 km.