सत्रह, अठारह, बीस का वो दौर भी कमाल था,
पर अनुभवों से सजा, यह '63वां' साल है।
बालों की यह सफेदी, गवाह हैं हर धूप-छांव की,
याद दिलाती हैं सफर में, रुकी हर उस छांव की।
साठ के बाद की ये गिनती, बूढ़ा हमें नहीं करती,
ये तो बस हमारी समझ में, और नए रंग है भरती।
बच्चों की हंसी में अब, अपनी ही शरारत दिखती है,
जिंदगी की किताब यहाँ, एक नई इबारत लिखती है।
काम की वो भाग-दौड़, अब थोड़ी सी ठहर गई है,
चाय की हर एक चुस्की, सुकून से भर गई है।
जिम्मेदारियां निभाईं पूरी, अब खुद के लिए जीना है,
खुशियों का जो बचा है रस, उसे जी भरकर पीना है।
दुआ है इस जन्मदिन पर, सेहत का वरदान रहे,
आपके इस प्यारे चेहरे पर, सदा ही मुस्कान रहे।
बढ़ती रहे ये उम्र मगर, दिल हमेशा जवान रहे,
अपनों के इस मेले में, हर लम्हा गुलजार रहे।
नीरज जी 63वें जन्मदिन की आपको ढेरों शुभकामनाएं!
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