अविश्वास के इस माहौल में, दुनिया सुकून खो रही है,
मशीनों की इस चमक-दमक में, रूह कहीं सो रही है।
हर कोई यहाँ व्यस्त है, पर खुशियों से महरूम है,
तरक्की की इस अंधी दौड़ में, इंसानियत ही मज़बूर है।
"दुनिया तो जुड़ गई मुट्ठी में, पर दिल दूर हो गए,
वक़्त बदल रहा है इतनी तेज़ी से, और हालात बदल रहे हैं।
मंज़िलों को पाने की अंधी चाह में, अब इंसान बदल रहे हैं।"
दिखावे की इस बनावटी दुनिया में, अब वो सादगी कहाँ मिलती है,
मशीनों के इस पत्थरीले दौर में, वो इंसानी हमदर्दी कहाँ मिलती है।
लाइक और कमेंट्स के बाज़ारों में, जज़्बात बिक रहे हैं,
स्मार्टफोन की स्क्रीन पर, झूठे मुस्कुराते चेहरे दिख रहे हैं।
भीड़ तो बढ़ती जा रही है शहरों में, पर हर शख्स अकेला है,
यहाँ हर कोई अपने ही बनाए, एक नए जाल में उलझा है।
भरोसा अब एक महंगा और नायाब खिलौना बन गया है,
सच्चा यार मिलना तो मानो, एक सपना सा हो गया है।
ऐसे में, हमारा यह छोटा सा ग्रुप एक सुकून का दरिया है,
इस बदलती मतलबी दुनिया में, खुलकर जीने का ज़रिया है।
चलो संभाल कर रखें इस दोस्ती को, जो बिना शर्तों के जिंदा है,
वरना आज के इस दौर में, हर रिश्ता किसी न किसी मतलब का परिंदा है।
फ्रेंडशिप डे की आप सभी विचारशील दोस्तों को दिल से शुभकामनाएँ!
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