Saturday, August 1, 2026

arjun-krishna

 अपने अंदर के अर्जुन को शांत करो जो में -में करता रहता है। अपने अंदर के कृष्ण को जगाओ और अपनी सोच और दृष्टि का विस्तार करो।

तब  आपको पता चलेगा की जब आप चिड़िया की आँख भेदने के पीछे  छिपे  क्षुद्र लालच पाने में लगे थे , तो कोई पूरा जंगल ही साफ कर दे रहा था।

लोकतंत्र कब गेंग तंत्र में बदल गया पता ही नहीं चला। क्योंकि तब आप सभ्य नागरिक की तरह अपनी मछली को भेदने में लगे हुए थे

इस बीच देश की संवैधानिक संस्थाओं का पंगु बना दिया। यहाँ तक की युवाओ का विश्वास इस तंत्र से पूरी तरह उठ जाये इसके लिए upsc, cbse, ssc जैसी संस्थाओं को बरबाद किया जा रहा है। जिससे वो पूरी तरह इस गैंग के नियंत्रण में सीधे सादे गुलाम रहे।

इसलिए हे पार्थ उठो और मछली छोड़ पूरे तंत्र से युद्ध की तैयारी करो।

तुम्हारे सामने तुम्हारे अपने ही होंगे।


इसे अच्छी तरह से समझ लो की अकेले से संगठन शक्तिशाली होता है। पर संगठन कैसा हो उसके नायक , नियम , कायदे क्या हो यह तय करने के लिए तुम्हे अपने अंदर के कृष्ण को जगाना होगा।जिससे अपने आस पास मौजूद अर्जुन को पहचानकर उसे सही दिशा दे सको। और बढ़े बदलाव का नेतृत्व कर सको।

वरना जो हो रहा है ....उसके नतीजे देखने के लिए हे पार्थ  जरा मछली के चक्कर बाहर निकलो।

63 rd year

 सत्रह, अठारह, बीस का वो दौर भी कमाल था,

पर अनुभवों से सजा, यह '63वां' साल  है।

बालों की यह सफेदी, गवाह हैं हर धूप-छांव की,

याद दिलाती हैं सफर में, रुकी हर उस छांव की।

साठ के बाद की ये गिनती, बूढ़ा हमें नहीं करती,

ये तो बस हमारी समझ में, और नए रंग है भरती।

बच्चों की हंसी में अब, अपनी ही शरारत दिखती है,

जिंदगी की किताब यहाँ, एक नई इबारत लिखती है।

काम की वो भाग-दौड़, अब थोड़ी सी ठहर गई है,

चाय की हर एक चुस्की, सुकून से भर गई है।

जिम्मेदारियां निभाईं पूरी, अब खुद के लिए जीना है,

खुशियों का जो बचा है रस, उसे जी भरकर पीना है।

दुआ है इस जन्मदिन पर, सेहत का वरदान रहे,

आपके इस प्यारे चेहरे पर, सदा ही मुस्कान रहे।

बढ़ती रहे ये उम्र मगर, दिल हमेशा जवान रहे,

अपनों के इस मेले में, हर लम्हा गुलजार रहे।

नीरज जी 63वें जन्मदिन की आपको ढेरों शुभकामनाएं!


2 AUG 2026, FRIENDSHIPDAY

 अविश्वास के इस माहौल में, दुनिया सुकून खो रही है,

मशीनों की इस चमक-दमक में, रूह कहीं सो रही है।

हर कोई यहाँ व्यस्त है, पर खुशियों से महरूम है,

तरक्की की इस अंधी दौड़ में, इंसानियत ही मज़बूर है।

"दुनिया तो जुड़ गई मुट्ठी में, पर दिल दूर हो गए,

वक़्त बदल रहा है इतनी तेज़ी से, और हालात बदल रहे हैं।

मंज़िलों को पाने की अंधी चाह में, अब इंसान बदल रहे हैं।"

दिखावे की इस बनावटी दुनिया में, अब वो सादगी कहाँ मिलती है,

मशीनों के इस पत्थरीले दौर में, वो इंसानी हमदर्दी कहाँ मिलती है।

लाइक और कमेंट्स के बाज़ारों में, जज़्बात बिक रहे हैं,

स्मार्टफोन की स्क्रीन पर, झूठे मुस्कुराते चेहरे दिख रहे हैं।

भीड़ तो बढ़ती जा रही है शहरों में, पर हर शख्स अकेला है,

यहाँ हर कोई अपने ही बनाए, एक नए जाल में उलझा है।

भरोसा अब एक महंगा और नायाब खिलौना बन गया है,

सच्चा यार मिलना तो मानो, एक सपना सा हो गया है।

ऐसे में, हमारा यह छोटा सा ग्रुप एक सुकून का दरिया है,

इस बदलती मतलबी दुनिया में, खुलकर जीने का ज़रिया है।

चलो संभाल कर रखें इस दोस्ती को, जो बिना शर्तों के जिंदा है,

वरना आज के इस दौर में, हर रिश्ता किसी न किसी मतलब का परिंदा है।


फ्रेंडशिप डे की आप सभी विचारशील दोस्तों को दिल से शुभकामनाएँ!