अपने अंदर के अर्जुन को शांत करो जो में -में करता रहता है। अपने अंदर के कृष्ण को जगाओ और अपनी सोच और दृष्टि का विस्तार करो।
तब आपको पता चलेगा की जब आप चिड़िया की आँख भेदने के पीछे छिपे क्षुद्र लालच पाने में लगे थे , तो कोई पूरा जंगल ही साफ कर दे रहा था।
लोकतंत्र कब गेंग तंत्र में बदल गया पता ही नहीं चला। क्योंकि तब आप सभ्य नागरिक की तरह अपनी मछली को भेदने में लगे हुए थे
इस बीच देश की संवैधानिक संस्थाओं का पंगु बना दिया। यहाँ तक की युवाओ का विश्वास इस तंत्र से पूरी तरह उठ जाये इसके लिए upsc, cbse, ssc जैसी संस्थाओं को बरबाद किया जा रहा है। जिससे वो पूरी तरह इस गैंग के नियंत्रण में सीधे सादे गुलाम रहे।
इसलिए हे पार्थ उठो और मछली छोड़ पूरे तंत्र से युद्ध की तैयारी करो।
तुम्हारे सामने तुम्हारे अपने ही होंगे।
इसे अच्छी तरह से समझ लो की अकेले से संगठन शक्तिशाली होता है। पर संगठन कैसा हो उसके नायक , नियम , कायदे क्या हो यह तय करने के लिए तुम्हे अपने अंदर के कृष्ण को जगाना होगा।जिससे अपने आस पास मौजूद अर्जुन को पहचानकर उसे सही दिशा दे सको। और बढ़े बदलाव का नेतृत्व कर सको।
वरना जो हो रहा है ....उसके नतीजे देखने के लिए हे पार्थ जरा मछली के चक्कर बाहर निकलो।