टेलीविजन सहित तमाम संचार माध्यमों का मूल काम समाज में फैली कुरीतियों और बुराइयों को उजागर करना होता है, जिस से भोली-भाली जनता इन सब के चक्कर में ना पड़ें और जनता की मेहनत की कमाई को इन लूटेरों द्वारा लूटे जाने से बचाया जा सके.
झूठे वादे और भ्रम फ़ैलाने वाले विज्ञापन के कार्यक्रमों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए सरकार ने कई नियम बनाए है पर इसके बावजूद इनका सही समय पर प्रयोग ना किये जाने के कारण इसका असर ना काफी हो जाता है.
ढेरों भ्रामक विज्ञापन इन दिनों प्रचार माध्यम खासकर टीवी पर प्रसारित हो रहे हैं. उनमें से कंही "निर्मल बाबा का दरबार" लग रहा है तो कंही कोइ फिल्मी सितारों के साथ संधी-सुधा तेल बेच रहा है या फिर शनिदेव का प्रकोप या यंत्र तंत्र के विज्ञापन. ये लोगो को जिंदगी को रातों रात बदलने का दावा कर, अपना माल बेच रहे है और आम जनाता को हर रोज लाखों करोडों का चूना लगा रहे है. अपने प्लांटेड लोगों को खड़ा कर ये लोग सवाल पूछ्वाते हैं या फिर अपनी और अपने उत्पाद की तारीफ करवाते है, बार-बार एसे दृश्य दिखाये जाने से आम जन इस झूठ मे फंस कर अपनी कमाइ लुटवाते है.
मेरा आग्रह उन सभी न्यूज चेनलों से है ..की अगर उन्हे लगता है की निर्मल बाबा जेसे लोग आम जनता को लूट रहे है तो वो एसे सभी लोगों को उजागर भले ही ना करे पर उनके विज्ञापनों पर पूरी तरह से रोक लगाये.
इस आसान कमाइ को छोडना इन चैनलों के लिये आसान नही होगा इसलिये इसके साथ ही विज्ञापनों पर नजर रखने के लिये एसी गौर सरकारी संस्था हो जो इन विज्ञापनों में किये गये गलत दावों पर नजर रख सके और समय समय पर लोगों को इसके बारे मे बताती रहे और उनके विरूध कानूनी कार्यवाही करने मे मदद करे.
हमे सरकार से कोइ खास उम्मीद नही है ...वेसे भी हमारी न्याय की देवी की आंखो पर तो पट्टी बंधी है. उसे ना कुछ दिखाइ देता है ना सुनाइ देता है. वो तो उस बंदर के समान मूक है और अब चालाक भी जो मोका मिलने पर दोनों बिल्लीयों को लूट लेता है.......