Wednesday, March 15, 2017

खंण्ड-7 धरर्ती पर वापसी

सफर (खंण्ड-1/16 एक्सीडेंट)
सफर (खंण्ड-2/16 देवदूत)
सफर ( खंण्ड-3 उलझन)
सफर (खंण्ड-4 स्वर्ग-नरक)
सफर (खंण्ड-5 नया आयाम)
सफर (खंण्ड-6 समझ)
सफर (खंण्ड-7 धरर्ती पर वापसी)
सफर (खंण्ड-8 हे इश्वर अभी क्यों नही)
सफर (खंण्ड-9 कल्पना की उडान)
सफर (खंण्ड-10 संगीत)
सफर (खंड-11 इश्वर से मिलने की जिद्द)
सफर (खंड -12 नर्क का अहसाहस)
सफर (खंण्ड- 13 दर्द क्यों)
सफर (खंण्ड- 14 जीवात्मा)
सफर (खंण्ड- 15 पुनर्जन्म)
सफर (खंण्ड- 16 पुनर्जन्म केसे)

खंण्ड-7 धरर्ती पर वापसी

ये सीढीयां किस जगह जाकर खत्म होंगी, मेने सीढीयों की तरफ बढते हुये पूछा.
किशन ने सीढीयों पर पेर रखते हुये कहा ...पता नही किशोर., क्योंकी इन्हे मेने नही तुमने बनाया है
ये कंही पहुचेंगी भी या नही .
कंही ना कंही ये जरूर पहुचेंगी.... जेसा मेने बताया यंहा टाइम और स्पेस कुछ अलग तरीके से काम करते है. यंहा से कनेक्शन अतिरिक्ष मे कंही भी जा सकते है.
ओह तो इसका मतलब यह सीढीयां हो सकता है हमे चांद पर पहुचा दे.
हां यह सभंव है पर उसकी संभावनायें नही के बराबर है. याद है मेने कहा था की इन सीढीयों को तुम्हारी चेतना ने बनाया है. इसलिये पूरी संभावना यह है की यह किसी एसी जगह हमे ले जायेगी जो तुम्हारे लिये महत्व की हो. क्या तुम इससे पहले चांद पर थे.
नही ...
तो मे शर्त लगाने को तैयार हू की ये सीढीयां तुम्हे चांद पर ले जाने से रही. मुझे लगता है की ये तुम्हारे अतीत या फिर हाल ही की किसी महत्वपूर्ण घटना की तरफ ले जायेगी.
दूर तक अंतहीन सीढीयों का ना खत्म होने वाला सिलसिला. मै और किशन साथ साथ सीढीयां पर चलने लगे.
कुछ देर बाद हमे कमरा दिखना बंद हो गया ...हम लगातार साथ साथ चलते रहे.
किसी भी अनहोनी का सामना करने के लिये अजीब सा रोंमांच मेरे अदंर भरने लगा. अचानक एक सीढी पर पेर रखते ही सीढीयां गायब हो गई. मैं धरती पर ठीक मेरी बरबाद हो चुकी कार के सामने था. सडक के किनारे अब भी वो उल्टी पडी है. चारों तरफ बिखरा कांच. सडक पर आते जाते ट्रेफिक का शोर. कार को  सडक के किनारे खिसका दिया गया था. सडक पर बिखरा कांच अब भी देखा जा सकता था. मेरी सारी संवेदानायें,  मेरा सारी व्यथा, गुस्सा बनकर मेरे अदंर उबाल लेने लगा की मेरी बेवकूफी की वजह से मे अब इस दुनिया मे नही हू.
मेने अपने अदंर एक गहरे खाली पन का अनुभव किया. दुख और गुस्से का बंवडर, मेरा सारा वजूद जेसे अब वो बंवडर था. मेने अपने अदंर एक तीव्र व्यथा का अनुभव किया. दुख और व्यथा की तीव्र वेदना से अपने को सरोवार...मुझे लगा की मे इसमे खो जाउगा.
मेरे दोस्त, मेर परिवार, एक एक करके मुझे सब याद आ रहे है ..व्यथा और दुख का सागर...महा सागर...लगा जेसे के इस बोझ के नीचे कुचल जाउगा...हे भगवान दुख और व्यथा का एसा चरम मेने पहले कभी महसूस नही किया लगा इससे कभी बाहर नही निकल पाउगा. मै खडा नही रह सका और वंही बैठ गया
मुझे इस दुख से बाहर निकालों
नही निकाल सकता ...तुम्हे खुद ही इससे बाहर निकलना होगा. तुम्हे खुद समझना होगा की इस गुजरे वक्त से अब तुम्हारा कोइ वास्ता नही है.
लगा जेसे मै  दुख और वेदना बंवडर हू और कुछ नही.
मेरे अदंर दुख का सागर उमड  रहा हो. मेरा मन रो रहा है. सब कुछ मेरे अदंर एसे उबाल मार रहा है जेसे बंद केतली मे उबलता पानी हो.  लगा जेसे दुख और व्यथा का अंतहीन सिससिला जो खत्म होने का नाम ही नही ले रहा हो.
मेने, इतनी वेदना अपनी सारी जिंदगी मे कभी महसूस नही की, ये मुझे क्या हो रहा है किशन ...इतना दर्द... मुझे इस से बाहर निकालो. अब और सहा नही जाता. कुछ करो किशन ....भगवान के लिये कुछ करो.
अपने अदंर की चेतना  मुझे बार बार बोल रही है इसे रोको...इसे रोको किशोर इससे बाहर निकालो
लगा जेसे एक विस्फोट हुआ हो और सब कुछ बह गया ... अब बचा है एक खाली पन अब व्यथा का थोडा  भी अंश नही बचा. अब मे पहले से बहुत अच्छा फील कर रहा हू.
मुझे क्या हुआ था? मुझे इतना खराब क्यों लगा.
अब केसा फील कर रहे हो
बहुत अच्छा
पर यह सब अभी अभी क्या हुआ था.
अब तुम्हारे पास वो पुराना शरीर नही है जो तुम्हारी भावनाओं को नियंत्रित करता. अब तो सब कुछ तुम्हारी चेतना को ही करना होता है.
इस कार को देखकर ..इससे जुडी सारी यांदें एक साथ तुम्हारे उपर हावी हो गई. और तुम भावनाओं में बह गये. उसे  नियंत्रित करने का कोइ उपाय नही था सिवाय इसके की तुम इस सच्चाइ को स्वीकर कर लेते की अब इस दुनिया से तुम्हरा कोइ वास्ता नही है ...जेसे ही तुम्हारी चेतना ने इसे स्वीकार किया ..सारा दुख और वेदना अपने आप तुरंत खत्म हो गई. 
किशन मेरा सारा  दुख और वेदना इस बात की थी की मेरी नादानी ने कितनी बडी घटना को अंजाम दे दिया था. मेरी गलती की सजा अब मेरे परिवार को झेलनी है.
किशोर मुझे मालुम है, मुझे तुम्हारी व्यथा का अहसाहस है.
मेने अपने को संभाला और किशन की ओर देखा. मै अपनों को देखने के लिये बेचेन हू. मै जानना चाहता हू की मेरे ना रहने पर अब वो सब केसे है.
अपने को संभालो और इस सच को एक बार फिर स्वीकार करो की ये दुनिया तुम्हारे बिना पहले भी चल रही थी और आगे भी चलती रहेगी. इस कार को देखकर तुम्हारा यह हाल हुआ था, परिवार को देखकर क्या तुम अपने को संभाल पाओगे.
हां मुझे मालुम है मेरे लिये ये सब कुछ अब खत्म हो चुका है. मे चाह कर भी अब इनके लिये कुछ भी नही कर सकता. फिर भी किशन दिल बेचेन है. दुखी है, मन अपनों को देखने को कर रहा है. कम से कम आखिर बार अपनों को देख सकू.
इससे क्या होगा
दिल को सकून मिलेगा
सकून किस बात का
की वो सब खुश है चेन से है ...
और अगर वो एसे ना हुये तो?
क्या तुम्हे पूरा विश्वास हे की तुम अपनी भावनाओं पर काबू कर पाओगे. एसा ना हो की तुम इस बार इस बंवडर कभी ना निकल पाओ
अब तुम्ही फेसला करो की तुम क्या करना चाहते हो. तुम्हारा मन का एक हिस्सा वापस धरती के अनुभव से जुडा है तुम्हे नही मालुम ये सब क्या है. तुम दो सच्चाइ मे बटे कभी बेहद गुस्से से तो कभी दुख से सरोबार तो कभी हिंसक हो जाने का मन करेगा.
अब तुम्हारे पास पुराना शरीर नही है जो तुम्हारी भावनाओं को नियंत्रित कर पाता, अब वो सब तुम्हारी चेतना को ही करना होता है.
जब जब  भौतिक दुनिया और तुम्हारी अध्यात्मिक चेतना के बीच इंटरेक्शन होगा,  इस तरह बंवडर तुम्हे घेरते रहेगे.
फिलहाल यह सब कुछ देर के लिये टल गया है. पर एसा कुछ देखते ही  हो सकता है इससे भी बुरे हलात से गुजरना पडे.
तो अब मै क्या करू
अपने को कुछ समय दो. जेसे जेसे तुम भौतिक और अध्यात्मिक चेतना के अंतर को समझते जाओगे. तुम्हारा अपनी भावनाओं पर नियंत्रण बेहतर होता जयेगा.
ओह तो जो लोग मृत्यु को स्वीकार नही कर पाते उनके साथ एसा ही अनियंत्रित भावनाओं का सेलाब आता है.
सच बोलू तो उससे भी बुरा.
सोचो अगर तुमने मृत्यु स्वीकार नही की होती तो तुम अपनों के पास वापस जाना चाहते. और अगर वो घर, परिवार वंहा ना हो , अगर वंहा नया घर, नये लोग आ जाये तो एसी हालत मे तुम्हारे सारे कनेक्शन टूट जायेगे. और तुम गुस्से और कंफ्यूसन का महा सागर बन जाओगे.
किशन एक बात मुझे अब तक समझ नही आई की अगर मेरा शरीर नही है तो मै भौतिक संसार को देख केसे पा रहा था क्योंकी भौतिक संसार को देखने के लिये तो आंखे चाहिये.
धरती पर तुम्हारी चेतना पर शरीर और उसकी इन्द्रीयों का अधिकार था उसके द्वारा उतपन्न शोर के कारण तुम्हारी चेतना कंही गहरी दब जाती थी. शरीर के द्वारा भेजे संदेशों के  विशलेषण करने मे ही तुम्हारी पूरी चेतना का समय और उर्जा लग जाता था.
इसीलिये धरती पर ध्यान का महत्व था की जिससे प्राणी अपनी चेतना से सहज संपर्क कर सके और जानवरों जेसी जिदंगी जीने से बच सके. अब जब की तुम्हारा भौतिक शरीर नही है इसलिये अब तुम्हारी चेतना सीधे उर्जा तंरगों से संपर्क कर पा रही है. जिसे पहचान कर तुम्हारी चेतना तुम्हारे लिये दृश्य का समायोजन करती है जिसे तुम समझ सको. इसलिये वो तुम्हे असली दृश्य लगते है. लगता है की तुम भौतिक जगत को असली मे देख रहे हो.
 भौतिक जगत मे मोजूद प्राणीयों से अगर मुझे संपर्क करना है तो मे केसे करू...
एसा संपर्क आसान नही होता. विशेष परिस्थितियों मे ही तुम एसा कर सकते हो. भौतिक जगत मे भी गिने चुने लोग ही  रूहों से संपर्क कर पाते है,  पर तुम अगर चाहो तो किसी से भी अपनी चेतना जोड सकते हो. तुम वो सब अनुभव कर सकते हो जो  वो प्राणी उस समय कर रहा होता है. पर एसा संपर्क एक तरफा होता है.
सब मेरे सिर के उपर से गया...मुझे कुछ समझ नही आया.
अरे यह संपर्क वेसा हे है जेसे तुम रेडियो सुनते हो, पर इसका मतलब यह नही के तुम उससे बात कर सकते हो. जिस व्यक्ति से तुम संपर्क कर रहे हो वो खुद अपनी चेतना को नही सुन पाता तो तुम्हारी चेतना को केसे सुन पायेगा. उसके लिये उसे विशेष प्रयास करने पडते है
कुछ लोग जो रूहों को देखने की बात करते हौ , उनका  क्या
ज्यादातर एसे किस्से झूठे और मनगंढत होते है और  कुछ मे वो हेलोनियेशन होता है. ...यानी जीते जागती आंखो का सपना. उसके वहम ने कुछ दृश्य बना दिये. कुछ दिखा दिया कुछ महसूस करा दिया. एसा अकसर अत्यधिक डर या बेसब्री से भी होता है... यह सब धीरे धीरे तुम सब समझ जाओगे.   

खंण्ड-6 समझ

सफर (खंण्ड-1/16 एक्सीडेंट)
सफर (खंण्ड-2/16 देवदूत)
सफर ( खंण्ड-3 उलझन)
सफर (खंण्ड-4 स्वर्ग-नरक)
सफर (खंण्ड-5 नया आयाम)
सफर (खंण्ड-6 समझ)
सफर (खंण्ड-7 धरर्ती पर वापसी)
सफर (खंण्ड-8 हे इश्वर अभी क्यों नही)
सफर (खंण्ड-9 कल्पना की उडान)
सफर (खंण्ड-10 संगीत)
सफर (खंड-11 इश्वर से मिलने की जिद्द)
सफर (खंड -12 नर्क का अहसाहस)
सफर (खंण्ड- 13 दर्द क्यों)
सफर (खंण्ड- 14 जीवात्मा)
सफर (खंण्ड- 15 पुनर्जन्म)
सफर (खंण्ड- 16 पुनर्जन्म केसे)

खंण्ड-6 समझ  

नही एसा नही है... क्योंकी कुछ लोग एसे भी है जो बहुत पहले मर चुके है. उसके बाद भी उन्होने यह स्वीकार नही किया की वो मर चुके है.
एसा क्या?
हां
उनके साथ एसा क्या हुआ होगा
वो खो गये, उनकी चेतना उसी घटना के साथ लोक हो गई. वो यह समझना ही नही चाहते की वो मर चुके है. वो इसे नकारते रहते है. अपनी उन्ही पुरानी यांदों मे केद छाया मात्र रह जाते है. उनके लिये ना कोइ भूतकाल है और ना ही भविष्य. बस वर्तमान रह जाता है.
ओके मान लिया एसों का कोइ भविष्य नही है. पर उनका भूतकाल तो होता ही होगा. उसी तरह जिस तरह मुझे अब भी बहुत कुछ अपने भूतकाल का याद है.
पर किशोर तुम अपने वर्तमान को भूतकाल के संदर्भ मे देख सकते हो, पर उनका भूतकाल एक बादल की तरह होता है जो उस घटना के चारो ओर ही घूमता रह जाता है. एसी घटना जिसे वो स्वीकार ही नही करना चाहते की वो हो चुकी है.
बस वो उस घटना के चारो ओर ही घूमते रहते है. वो पीछे मुडकर भूतकाल को एक अच्छे अनुभव की तरह या उस गलती की तरह जिससे वो कुछ सीख ले सके. तुम्हारी जेसा नही देख पाते.
वो यह समझ नही पाते की जो वो थे अब नही है. क्योंकी अब वो जिन्दा नही है, उसके बावजूद वो उसी घटना के चारो ओर घूमते रहते है. उसमे से वो बहुत सी यादें को भूलते जाते है. क्योंकी वो घटना के साथ अपना समायोजन नही कर पा रहे.
वो स्वीकार ही नही कर पा रहे है की वो मर चुके है. बस वो ही यादें बची है की वो क्या थे. न की वो क्या है. उसी घटना के चारो ओर घूमते रहते है और बाकी सब चीजों को अनदेखा कर देते है.
क्या रूहे वापस धरती पर आ सकती है ?
हां ओर नही भी . वो इस तरह नही जा सकती जेसा पहले जा स्कती थी. अब उनका कोइ शरीर नही है. इसलिये उससे जुडा कोइ भौतिक गुण भी नही है. पर लिंक होता है ओर कोइ भी रूह उसका अनुसरण कर सकती है.
ये रूहे उन्ही लिंक को पकड लेती है और उन्हे छोडती नही. सारा ध्यान उसी लिंक पर होता है. बाकी सब उसंके लिये बेमानी होता है. एसी अध्यातमिक उर्जा जो गेर अध्यातमिक संसार यानी धरती के किसी लिंक को पकडे रह जाती है.
एसा मेरे साथ भी हो सकता था?
हां यह किसी के साथ भी हो सकता है. जब तुम पहली बार यंहा आये थे तो तुम्हे भी निर्णय लेना था. तुम भी इस नये सच को स्वीकार या नकार सकते थे.
मुझे याद आया की उसे स्वीकार करते समय कितना खाली पन मेने अपने अदंर महसूस किया था.
अब उन सीढियों को देखो. तुमने उन्हे तब बनाया जब तुमने इस कमरे को बनाया. जब तुम इस आयाम पर आये तो तुम यह निर्णय नही पर पाये थे. तुम अब भी ठीक से निर्णय नही कर पाये हो. ये सीढीयां इस बात का सबूत है. वो तुम्हारे बाहर निकल जाने का रास्ता है.
रास्ता किधर जाने के लिये?
वंही उस ब्रहमांड में वापस जाने के लिये जिसे तुम अब तक जांनते थे. अगर तुम ने मौत को स्वीकार नही किया होता तो तुम उसी भौतिक प्लेन मे चले जाते. जिसमे इससे पहले थे. यह लिंक तो बना रहता है और तुम पिछले आस्तित्व को तो देख ही सकते हो. एसे मे इसकी संभावना बनी रहती है की तुम इन दो सच्चाइयों के बीच झूलते रह जाते. जो किसी भी सूरत मे सही नही होता.
मेने उन सीढीयों की तरफ इशारा करते हुये कहा ...ये किधर को जाती है
किशन ने अपने कंधे सिकोडे , शायद यह अभी भी उस ब्रहमांड से जुडी हो जिससे तुम आये हो. शायद उस जगह से जो अब भी तुम्हारे लिये महत्व पूर्ण है.
एसा क्या ? तो क्यों न इसे एक बार देखा जाये.

खंण्ड-5 नया आयाम

सफर (खंण्ड-1/16 एक्सीडेंट)
सफर (खंण्ड-2/16 देवदूत)
सफर ( खंण्ड-3 उलझन)
सफर (खंण्ड-4 स्वर्ग-नरक)
सफर (खंण्ड-5 नया आयाम)
सफर (खंण्ड-6 समझ)
सफर (खंण्ड-7 धरर्ती पर वापसी)
सफर (खंण्ड-8 हे इश्वर अभी क्यों नही)
सफर (खंण्ड-9 कल्पना की उडान)
सफर (खंण्ड-10 संगीत)
सफर (खंड-11 इश्वर से मिलने की जिद्द)
सफर (खंड -12 नर्क का अहसाहस)
सफर (खंण्ड- 13 दर्द क्यों)
सफर (खंण्ड- 14 जीवात्मा)
सफर (खंण्ड- 15 पुनर्जन्म)
सफर (खंण्ड- 16 पुनर्जन्म केसे)

खंण्ड-5 नया आयाम  

इसका मतलब-, तुम नही बता सकते की मे इस समय मे कंहा हू.
मेने बोला ना इस आयाम का कोइ रेफरेंस नही है. मै तुम्हे इसे किसी नक्शे पर नही बता सकता. एसा नही है की तुम इस समय ब्रहमांड मे पृथ्वी से दूर किसी ओर जगह पर हो.
इसे एसे समझो की तुम ब्रहमांड से चांद, तारे, सूरज, ग्रह, उपग्रह, धरती, उल्कायें, आकाशगंगायें सब कुछ गायब कर दो, तो क्या बचेगा. मात्र शून्य. एसे मे अब तुमसे कोइ पूछे की तुम कंहा हो तो तुम क्या बताओगे. असल मे यह ब्रहमांड के साथ ही है पर उससे अलग है दोनों घुलेमिले नही है फिर भी एक के बिना दूसरा नही.
इसका मतलब यह पूरी तरह खाली जगह है
अरे अब यह खाली कंहा रही , अब इसमे,  मे हू,  तुम हो, यह कमरा है, असल मे इसे तुमने अपनी चेतना  से भर दिया है. यह मात्र चेतना नही है यह तुम्हारी कल्पना भी है. यह सारी जगह तुम्हारी सृजन से भर गई है. जो भी तुम देख या महसूस कर रहे हो तुम्हारा ही बनाया हुआ है.
तो यह कमरा मेरा बनाया हुआ है, मेने अविश्वास से उसे देखा.
हां सही कहा
मुझे अब भी विशबास नही हो रहा है, की यह सब मेरा बनाया हुआ है ... मे यह सब क्यों करूगा .
इसमे कुछ भी अजीब नही है, तुम्हारी चेतना ने तुमहारे अब तक ज्ञान और अनुभव का उपयोग करते हुये यह सब तुम्हारे लिये बनाया है. वेसे ही जेसे सपना मे होता है. तुमने वो चुना जो तुम्हे सबसे सुरक्षित लगा. आसान लगा , तुमने दिवार और छत का उपयोग करते हुये अपने लिये यह स्पेस बनाया. अब यही तुम्हारा रेफरेंस भी है. जब तक तुमने नही सोचा था यह कमरा नही था.
जेसे जेसे तुम्हारी चेतना का विस्तार होगा, तुम जेसे जेसे समझोगे के तुम क्या क्या कर सकते हो तुम्हारी चेतना और भी नई और अनोखी चीजे बनायेगी.
तो इस रूम को मेने बनाया क्योंकी यह मुझे सुरक्षित और आसान लगा था. मै चाहू तो इससे भी जटिल चीजों का निर्मण कर सकता हू.
किशन मुझे देखकर मुस्कराया, मुझे तुम्हारी सोच पसंद आइ. हां अब तुम मेरी बात को समझ पा रहे हो. यह जगह तुम्हारी अपनी है. तुम्हारी अपनी दुनिया तुम जो चाहो यंहा बना स्कते हो. ओर जब तुम इस सब से बोर हो जाओगे तो तुम कुछ ओर नया बनाओगे.
मेने अपने हाथों को देखते हुये कहा ..इस शरीर के बारे मे तुम्हारा क्या ख्याल है, मै तो मर चुक हू तो क्या यह शरीर भी मेने खुद बनाया है.
अब तुम बहुत जल्द समझ रहे हो. तुम्हारा शरीर तो कब का खत्म हो चुका है. उसे कब का तुम्हारे लोगों ने जला दिया. यह तो तुम्हारी चेतना है जो कभी भी मर नही सकती. यह हमेशा रहेगी. तुम्हे इस शरीर की आदत हो गई है. इसलिये सबसे पहल तुम ने इसे बनाया.
मेरे कपडे ? जब मेरा एक्सीडेंट हुआ था तब तो मे कुछ ओर पहना हुआ था.
एसा नही है की मरने के बाद तुम किसी शो रूम मे गये और अपनी पसंद के कपडे चुन लिये...यह सब भी तुम्हारा ही सृजन है. क्योकी तुम इनमे अपने को सहज महसूस करते हो.
तो इसका मतलब यह की यह शरीर कभी भी अपने असली स्वरूप मे नही होगा. अगर इसे मेने बनाया है तो इसे तुम मेरा दृष्टी भ्रम भी कह सकते हो.
पहली बात की इसे तुमने बनाया है इसलिये यह दृष्टी भ्रम नही है इस स्पेस मे तुम रियल हो
मुझे कुछ समझ नही आ रहा है. भले ही रियल है इसे बनाया तो मेरे मन ने है. जेसे मेने कोइ छद्म आवरण ओड लिया हो. क्या हो अगर मे जान सकता की रूह केसी दिखती है. अगर मे उसे इस शरीर के बिना देख सकता.
यह तो समझाना मुशकिल है
क्यों?
क्योंकी इस समय तुम्हारे सोचने का तरीका वही है जो पिछली जिंदगी मे था. अब जेसे तुमने कहा की तुम देखना चाहते हो की तुम केसे दिखते हो इसका मतलब उसे तुम अपनी आंखो से देखना चाहते हो. पर दोस्त सच यह है की तुम्हारी तो आंखे ही नही है.
पर मे तुम्हे देख सकता हू.
असली मे तुम मुझे देख नही रहे हो. तुम्हारा मन जेसा चाह रहा है वेसा ही तुम मुझे महसूस कर रहे हो.
देखने और महसूस करने मे फर्क है.
मै समझा नही
देखो धरती पर देखने की प्रक्रिया मे आंखे पदार्थ से आती रोशनी को तुम्हारे दिमाग में विद्युत तरंगों के रूप मे सिग्नल भेजती थी. तुम्हारी चेतना उस सिगनल से उस पदार्थ को पहचानती और इस तरह उससे तुम्हारी चेतना जुड जाती. अब क्योंकी तुम्हारा  शरीर  ही नही है इसलिये आंखे भी नही है, अब चेतनाये एक दूसरे से सीधे जुड सकती है. और तुम अपने अनुभव के अनुसार उन्हे उसी रूप मे देखोगे जिस रूप मे उन्हे पहले देखते थे. यह समझने  मे अजीब है, बस इतना समझ लो की तुम शरीर के बिना भी अगर चाहो तो भौतिक जगत को उसी रूप मे अनुभव कर सकते हो. बस उसका विज्ञान अलग है, वेसे ही जेसे धरती पर टीवी और  रेडियो का विज्ञान.     
अब समझे ना की तुम मुझे  जेसा महसूस करना चाहते हो मे वेसा ही हू.
तो क्या तुम मुझे भी अलग तरीके से देख रहे हो. क्या इस कमरे को भी तुम अलग तरीके से देख रहे हो.
नही किशोर मे वही देख रहा हू जो तुमने बनाया है. असल मे देखना सही शब्द नही है. क्योंकी जेसा मेने तुम्हे बताया अब तुम्हारी आंखे नही है. इसलिये अब तुम देख नही सकते, बस अनुभव कर सकते हो. किसी के प्रति चेतन हो ओर उसे महसूस करते हो.
इस जगत में किसी को समझने के लिये उसका भौतिक रूप मे होना जरूरी नही है. तुम्हे सुनने के लिये अब किसी ध्वनी तंरगों की जरूरत नही है. तुम्हारी समझ तुम्हारी अध्यातमिक चेतना पर निर्भर है. यह चेतना समय के साथ बढती ही जायेगी.
सच कंहू किशन जो कुछ भी तुमने मुझे बताया सब मेरी समझ से बाहर है. पर इसके बाबजूद मुझे कोइ निरशा नही हो रही है. बस मुझे एसा लग रहा है जेसे तुम्हारे समझाने और मेरे समझने के बीच एक हल्की सी धुधं है. जिसके हटते ही मुझे साफ समझ आ जायेगा.
वही धुंध जो एक्सीडेंट का कारण बनी... किशन ने हंसते हुये कहा
हां वही धुंध मे होले से मुस्कराया. इस बार वो मुझे सही समझ पाया था
किशोर बस कुछ ओर समय अपने को दो. ओर सब समझ जाओगे. अभी तो तुम्हे अपनी पिछली यांदों से बहुत कुछ को विदा करना है. अभी तो बहुत कुछ एसा है जो तुम्हे अनुभव करना है.
मेने उसकी बात पर हां मे गरदन हिलाइ. पर अदंर जिज्ञासा बढती जा रही है, पर जेसा किशन ने कहा मुझे तसल्ली रखनी होगी. शायद समय के साथ मुझे सब कुछ समझ आ जायेगा.
किशन अब तक मुझे यह समझ आया है की मेने अपनी आत्मा के लिये शरीर बनाया, इस कमरे को बनाया और तुम्हे बुलाया. पर सच यह है की मुझे नही मालुम की मे कंहा हू. और मे यंहा केसे आया.
हां अभी भी तुम थोडे निराशावादी लग रहे हो, तुम अपने चारो ओर देखो ओर समझो की तुम ने यह सब थोडी ही देर मे सीखा और बनाया है. तुमने अच्छी प्रगति की है किशोर जिसका क्रेडिट तुम्हे खुद को तो देना ही चाहिये.
मेने उदासीन चेहरा बनाते हुये कहा ....मुझे नही लगता की मेने कोइ प्रोग्रेस की है बस इतना है की मे अब समझ गया हू की धरती पर मेरी मौत हो चुकी है
 वंहा मेरे लिये अब सब कुछ खत्म हो गया है. अब मे एसी जगह पर हू जेसे किसी ने थक कर गाडी को पार्क कर दिया है.
किशोर जिस दौर से तुम गुजर रहे हो वो कोइ अजूबा नही है. मै समझ सकता हू तुम इस समय केसा महसूस कर रहे हो. या क्या महसूस नही कर पा रहे हो. पर इस बात को समझो की यह तो बस एक शुरूआत भर है
शुरूआत किसकी ?
किशन ने हाथ फेलाकर सारे कमरे को देखा शुरूआत है की क्या संभव है, तुमने इस कमरे को बनाया, अब जेसे जेसे तुम आगे बढोगे वेसे वेसे बहुत कुछ आशचर्य जनक होने वाला है. मै हमेशा तुम्हारी सहयता के लिये तुम्हारे साथ रहूगा.
ओके तो तुम अगर मेरी साहयता करना ही चाहते हो तो पहले यह बताओ की मे यंहा आया केसे. ओर असली मे मेरी मौत केसे हुई.
वो एक कार एक्सीडेंट था. उस टक्कर के समय ही तुम्हारी कार बुरी तरह बरबाद हो गई.
पूरी तरह बरबद हो गई?
हां पूरी तरह , वेसे भी अब तुम्हे उस कार की कोई जरूरत नही होगी, किशन ने मुसकराते हुये कहा
अच्छा किशन क्या मे उसी समय मर गया था, या मेरी मौत अस्पताल मे हुई, क्योंकी मुझे कुछ याद नही है.
हां वो सब तुरंत हुआ था, जेसे ही तुम्हारा सिर कार की छत से टकाराया तुम्हारा सिर बुरी तरह फट गया , तुम्हारी गरदन टूट गई. तुम्हारे सीने की पसलियों स्टेयरिंग से टकराने से टूट गई थी. इस सब के कारण तुम्हारी उसी समय मौत हो गई.
एक मिनिट किशन...तुमने तो कहा था की तुम मेरी पिछली जिदंगी के बारे मे कुछ नही जानते...याद है जब मेने तुमंसे पूछा था की क्या तुम मेरे दवदूत हो ..तो तुमने एसा ही कहा था ना और अगर वो सही था तो फिर तुम यह सब केसे जानते हो.
मेरे इस उलझन भरे सवाल से उसे कोइ उलझन नही हुई , वो उसी शांती से बोला.
याद है किशोर मै चीजों को थोडा अलग तरीके से समझता हू. और मे देखने भर से ज्याद चेतन हू. मुझे तुम्हारे जीवन के बारे मे कुछ नही मालुम पर इसके बाबजूद मे तुम्हारी मौत को देख सकता हू.
तुम्हारी मौत एक घटना थी जिसके फलस्वरूप तुम यंहा हो. और यह मे समझ सकता हू. जेसे जेसे तुम्हारी समझ बढेगी. मेरी बांतो को बेहतर समझ पाओगे.
तुम्हारी बातें कनफ्यूसिंग है हम हर बार घूम फिर कर वंही आ जाते है.
वो इसलिये हो रहा है क्योंकी तुम एसे बर्ताव कर रहे हो जेसे अब भी तुम जिंदा हो.. इस समय बस तुम अपनी सहूलियत के हिसाब से सोच रहे हो एक बात समझ लो की पिछली जिंदगी मे तुम्हारी भौतिक अनुभव तुम्हारी इन्द्रीयों के कारण था. तुम्हारे पास देखने को आंखे थी, सुनने को कान थे, और सूघने के लिये नाक थी, चखने के लिये जीभ थी,  सर्दी गर्मी और दबाब को महसूस करने के लिये त्वचा थी. दर्द को महसूस करने के लिये मांस पेशियां थी.
तुम्हे भौतिक जगत को जानने के लिये इन पर पूरा भरोसा था. इनके द्वारा दी गई जानकारी के बल पर तुमने पिछली जिंदगी को जिया था. तुम अब भी उसी तरह की इन्द्रीयो का भरोसा कर रहे हो. जबकी सच यह है की अब वो तुम्हारे पास नही है. फिर भी तुम अपने चारो तरफ के माहोल के प्रति चेतन हो.
अब तुम्हे समझने के लिये अलग लेवल के समझ की जरूरत है. जब की तुम अब भी बार बार पिछली जिदंगी के हिसाब से चीजों को समझना चाहते हो.... इस लिये तुमने यह शरीर बनाया. क्योकी एसा करके तुम अपने को ज्यादा सहज महसूस कर रहे हो.
अच्छा चलो तुम इसे इस तरह समझो, सोचो तुम्हारा नवजात शिशु के रूप मे फिर से जन्म होता है , एसे मे उस नवजात को बहुत कुछ सीखना और समझना होगा तभी वो उस दुनिया की सरहाना कर पायेगा जिसमे उसने जन्म लिया है.
तुम भी उस नवजात की तरह हो. तुम्हे यंहा अनुभव लेना है. पनपना है. जिससे तुम इसे और अच्छी तरह समझ पाओ. की यंहा क्या क्या संभवानायें है.
बहुत मजेदार..यह उदाहरण सच बहुत अच्छा रहा. सच ही तो है इस जगत मे एक शिशु ही तो हू. जो अभी अभी पैदा हुआ है.
अच्छा किशन अब मुझे थोडा पीछे जाने दो... तुमने कहा था की मेरे इस सच को स्वीकार कर लेने के बाद की मेरी मौत हो चुकी है तुम मुझे दिखाई दिये. इसका क्या मतलब हुआ?
मेरे ये मान लेने के बाद की मै मर चुके हू मेने तुम्हे पाया. इसका मतलब यह है की अगर मै यह नही मानता तो तुम मुझे कभी दिखाई नही आते... पर देर सबेर मै यह मान ही लेता की मे मर चुका हू बस कुछ समय ही की तो बात थी , उसके बाद तो तुम आ ही जाते ना. क्योंकी आज नही तो कल मुझे मानना ही पडता की मे मर चुका हू.

खंण्ड-4 स्वर्ग-नरक

सफर (खंण्ड-1/16 एक्सीडेंट)
सफर (खंण्ड-2/16 देवदूत)
सफर ( खंण्ड-3 उलझन)
सफर (खंण्ड-4 स्वर्ग-नरक)
सफर (खंण्ड-5 नया आयाम)
सफर (खंण्ड-6 समझ)
सफर (खंण्ड-7 धरर्ती पर वापसी)
सफर (खंण्ड-8 हे इश्वर अभी क्यों नही)
सफर (खंण्ड-9 कल्पना की उडान)
सफर (खंण्ड-10 संगीत)
सफर (खंड-11 इश्वर से मिलने की जिद्द)
सफर (खंड -12 नर्क का अहसाहस)
सफर (खंण्ड- 13 दर्द क्यों)
सफर (खंण्ड- 14 जीवात्मा)
सफर (खंण्ड- 15 पुनर्जन्म)
सफर (खंण्ड- 16 पुनर्जन्म केसे)

खंण्ड-4 स्वर्ग-नरक

मेने देखा किशन की मुस्कान चली गई. मै इस बारे मे तुमसे कोइ बात नही करना चाहता हू. यह मेरा काम भी नही है मै तो बस तुम्हे मदद देने के लिये हू की तुम्हारे साथ अभी जो कुछ हुआ है और आगे जो कुछ भी है उस बारे मे तुम्हारे सवालो का जबाब दू. और तुम्हे गाइड करू. तुम नर्क मे नही हो यह सच है. इसलिये फिलहाल इस बारे मे हम कोइ बात नही करेगे.
उसके इस जबाब से मुझे कोइ संतुष्टी नही हुई. मै पिछली जिंदगी मे इस बारे मे बहुत सजग था की मेरे से कुछ गलत ना हो जाये. पर लगता है अब इस नर्क के बारे मे बात करके कोइ मतलब नही जिस जगह अब मेरा जाने का सवाल नही है अब उस बारे मे बात क्यों की जाये.
तो यह नर्क नही है. तो इसका मतलब यह स्वर्ग है. मेने सही कहा ना.
हां तुम एसा बोल सकते हो
क्या मतलब की मै एसा बोल सकता हू !..देखो मे किसी नतीजे पर पहुचने से पहले यह पक्का कर लेना चाहता हू. इसलिये मेने यह तुम से सवाल दुबारा किया है
स्वर्ग एक व्यक्तिगत व्याख्या है
तो क्या यह नर्क नही है
नही यह नर्क नही है. किशन ने तुरंत जबाब दिया.
देखो मुझे ठीक से समझाओ,  मेने जो सवाल किया है उसका मुझे पक्का जबाब नही मिला है
किशन  ने मुझे शांत नजरो से देखते  हुये कहा, देखो तुम मर चुके हो यह सच है. और अब तुम्हे यह भी मालुम है की यह नर्क नही है. मुझ पर विशवास करो यह बहुत अच्छी बात है.
अगर तुम मुझ से पूछो तो यह सच मे बहुत बढी बात है, और तुमने अच्छी प्रोग्रेस की है .
ठीक है... ठीक है मेने अच्छी प्रोग्रेस की है. पर तुमने मेरी बात का अब तक जबाब नही दिया. की क्या यह स्वर्ग है. तुमने बस यह बोला की इस जगह को मे स्वर्ग कह सकता हू. पर मे इसे स्वर्ग केसे कह सकता हू जबकी मुझे इसमे कोइ खास बात नजर नही आ रही है.
तुमने पूछा क्या ये स्वर्ग है ...पर मुझे नही पता की स्वर्ग से तुम्हारा क्या मतलब है. मे तो यह चाहता हू की यह निर्णय तुम्हारा खुद का हो.
तो तुम नही बताने वाले की मे कंहा हू
नही...मे चाहता हू की यह निर्णय तुम खुद करो
ओके फाइन , कम से कम यह तो बता दो की मै टाइम और स्पेस मे अब कंहा हू ...क्या अब भी मे धरती पर हू या फिर किसी अनजान ग्रह पर?
मेरे सामने! किशन ने हंसते हुये कहा, मुझे मालुम है तुम्हे मुझसे इस समय चिढ हो रही है.
जो भी हो मे उसकी बांतो से पकने लगा. उसकी लाग लपेट वाली बातों को सुनकर मेरी इच्छा लम्बी सांस छोडने की हुई जो मे तब करता था, जब धरती पर पूरी तरह पक जाता था. पर इस समय वो भी नही कर सकता क्योंकी मे सांस ही नही ले रहा हू
एक बात पर मेने गोर किया की मुझे ना तो गुस्सा आ रहा है और ना ही निराशा हो रही है. अगर इस तरह कोइ मुझे धरती पर पकाता तो मे गुस्से से आग बबूला हो जाता.
इस समय मेरी फीलिंग पूरी तरह मेरे कंट्रोल मे है. धरती पर एसे मोकों पर बाहर से जरूर शांत बना रहता था पर अदंर गुस्से का लावा उबाल लेता था, इस समय एसा कुछ नही हो रहा है. पर जिज्ञास अब भी बनी हुई है.
ओके तुम भले ही मुझे यह ना बताओ की मे कंहा हू पर यह तो बताओ की यह सब क्या चल रहा है. चलो मान लो की मे मर गया हू अब मेरा धरती से कोइ वास्ता नही है. मेने सही कहा ना
यह सही है की तुम इस समय धरती पर नही हो
असल मे तुम इस समय एसे आयाम मे हो जिसका कोइ रेफरेंस नही है. तुम अब एक अलग सच्चाइ मे हो. तुम एसे आयाम मे हो जिसे तुम्हारा शरीर कभी प्राप्त नही कर पाता. बहुत से लोग उसे जीवन के बाद की स्थति कहते है. अभी इसे तुम नही समझ पाओगे, तुम कनफ्यूस हो जाओगे देखा नही स्वर्ग और नर्क ने भी तुम्हे केसा  कनफ्यूस कर दिया है.